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उत्तराखंड सड़क दुर्घटनाए ...कब रुकेगा खूनी खेल !!

                                                                   

उत्तराखंड मैं कभी न रुकने वाले सडक हादसों मैं आज एक और हादसा जुड़ गया है , रामनगर से चौखुटिया जा रही एक गढ़वाल मोटर्स ओनर्स यूनियन लिमिटेड की बस  भतरौजखान के निकट मोहनारी मैं खाई मैं गिर गयी जिसमे 6 लोगो के मौत हुई है और बहुत से लोगो के हताहत होने की खबर आ रही है ! इस घटना के साथ इस वर्ष अब तक पहाड़ी क्षेत्र मैं सड़क दुर्घटनाओ मैं 456 लोगो ने जान दे दी है !

इस वर्ष हुई घटनाओ जिनमें पांच या पांच से अधिक लोगो की मौत हुई है !

3 सितम्बर को गंगोत्री मैं टेम्पो दुर्घटना मैं 9 श्रधालुओ की मौत !

19 जुलाई को टिहरी मैं रोडवेज बस दुर्घटना मैं 14 लोगो ने जान गवाई !

1 जुलाई को धुमाकोट बस दुर्घटना मैं 48 मौते हुई !

18 मई चम्पावत मैं 11 लोगो ने जान गवाई !

14 मई उधम सिंह नगर 5 की मौत !

13 मई अल्मोड़ा 14 की मौत !

13 मार्च देघाट से रामनगर जा रही बस टोटाम पर दुर्घटना ग्रस्त 13 लोग मरे और 14 घायल !

15 फरवरी चमोली सुमो दुर्घटना ग्रस्त 5 की मौत !

7 फरवरी मैक्स दुर्घटना ग्रस्त 10 की मौत !


  और मौत का यह तांडव खत्म होने का नाम नहीं ले रहा ! एक सर्वे के अनुसार अगर दुर्घटनाओ के कारणों पर नजर डाले तो , मुख्य कारणों मैं लापरवाही से गाडी चलाना, शराब पीकर गाड़ी चलाना, चलते समय मोबाइल का प्रयोग , 69% और दूसरा मुख्य कारण जो उभर कर आया है वह है सड़क खराबी का कारण है जिसके लिए प्रशासन जिम्मेवार है , धुमाकोट की घटना जिसमे 48 लोगो ने जान गवाई थी उसका भी मुख्य कारण सड़क की ख़राब हालत थी ! धुमाकोट दुर्घटना मैं यह कारण भी सामने आया था की सरकारी विभाग ने सड़क मरम्मत के लिए होने वाले वार्षिक खर्च का भुगतान समय पर नहीं किया जिसके कारण वर्षा से पहले होने वाले इस कार्य को विभाग नहीं कर पाया और जिससे सड़को की हालत और जर्जर हो गयी ! सरकार की इस लापरवाही से हर वर्ष सैकड़ो यात्रियों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है !

सड़क दुर्घटना एक बहुत बड़ा कारण है जिसके कारण हर वर्ष पहाड़ी क्षेत्र मैं  इतने लोगो को जान गवानी पड़ती है ,  यदि  दुर्घटना के 2 घंटे के अन्दर फर्स्ट ऐड या मेडिकल सहयता पीड़ित को मिल जाए तो , बहुत सारे जीवन और बच सकते है ! एक सर्वे के अनुसार  भारत मैं 6 घायल मैं से 1 जान गवाता  है जबकि अमेरिका मैं यह अनुपात 200 घायलों मैं सिर्फ 1 की है , इससे ही आप अनुमान लगा सकते है की पहाड़ मैं चिकित्सा व्यवस्था कैसी है ! बचाव कार्य के लिए हम बिलकुल भी ट्रेनेड नहीं है ! मौजूदा हालत स्वास्थ्य ब्यवस्था पर भी एक बहुत बड़ा प्रश्न चिन्ह लगाती है , पहाड़ी क्षेत्र मैं शायद एक भी ट्रामा सेण्टर नहीं है , और जहा भी ट्रामा सेण्टर है वहा उपकरण नहीं है जिससे की मरीज का इलाज किया जा सके ! सरकारी अस्पताल के नाम पर सिर्फ सरकार खानापूर्ति करती आई है , पहाड़ के मरीज को अंत मैं लगभग 400 किलो मीटर दूर दिल्ली आना पड़ता है ! 18 वर्ष मैं किसी भी सरकार का ध्यान कभी इस ओर नहीं गया और जिस प्रकार से सरकार जनता की मांगो की अनदेखी कर रही है इससे लगता है कि भविष्य मैं भी इस प्रकार से जान गवाने का सिलसिला जारी रहेगा !

चौखुटिया के अस्पताल का ही उधारण लेते हुए , यहाँ यह लिखना चाहता हु की  वहा अब डॉक्टर भी है नर्स भी है परन्तु अभी भी वहा पिछले कई वर्षो से एक्स रे मशीन और अल्ट्रा साउंड मशीन ख़राब पड़ी  है जिनकी सुध लेने वाला कोइ नहीं है ! चिकिस्त्सा व्यवस्था पहाड़ मैं शून्य के बराबर है , दोनों राष्ट्रीय दलों की सरकारों ने यहाँ बारी बारी शासन किया है परन्तु पहाड़ की हालत और खस्ता होती जा रही है !

पहाड़ क्षेत्र मैं फर्स्ट ऐड और आपत्कालीन घटनाओ से निपटने के लिए सरकार को स्थानीय लोगो को ट्रेनेड करना पड़ेगा जिससे वह घटना के पहले दो घंटो मैं घायलों को फर्स्ट ऐड दे सके , ट्रामा सेण्टर हर जिले मैं होना चाहिए और उस से बड़े खतरे के लिए एयर एम्बुलेंस की व्यवस्था होनी चाहिए ! अक्सर एयर एम्बुलेंस नेताओ ओर बड़े अधिकारियो के परिजनों के लिए तो उपलब्ध रहती है परन्तु आम जनता के लिए बड़ी मुश्किल से उपलब्ध हो पाती है !

इस क्षेत्र मैं तभी सुधार संभव  है जब आम जनता सरकार से इस बारे मैं लगातार्  संवाद और सवाल करेगी अन्यथा बाकी व्यवस्थाओ की तरह   इस सब को भी   देवता के सहारे ही छोड़ना पड़ेगा !

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