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देवभूमि की डायरी: आस्था और विवेक का संगम

  देवभूमि की डायरी: आस्था और विवेक का संगम पहाड़ों की जिंदगी में विज्ञान और आस्था का अजीब सा रिश्ता है। जहाँ एक तरफ लोग स्मार्टफोन पर मौसम का हाल देख कर खेती करते हैं, वहीं दूसरी तरफ फसल की रक्षा के लिए देवी-देवताओं से गुहार भी लगाते हैं। मैं इस दोनों के बीच का साक्षी रहा हूं। हमारे पहाड़ी समाज में यह दोनों धाराएं समानांतर बहती हैं, कभी एक-दूसरे को काटती हैं, तो कभी एक-दूसरे को समृद्ध करती हैं। मेरा बचपन पहाड़ की एक छोटी सी घाटी में बीता, जहाँ हर सुबह देवी के मंदिर की घंटी से शुरू होती थी। याद है, दादी कहती थीं कि जब तक देवी का आशीर्वाद न ले लो, दिन की शुरुआत अधूरी है। उन्हीं दिनों टेलीविजन पर कृषि दर्शन भी देखा करते थे, और पिताजी नई-नई खेती की तकनीकों को अपनाने की कोशिश करते। यह विरोधाभास नहीं था, बल्कि एक संतुलन था जो हमारे जीवन का हिस्सा था। बचपन से ही देखता आया हूं कि हमारे यहाँ हर पहाड़ की अपनी कहानी है, हर गाँव का अपना देवता। इन देवताओं से हमारा नाता सिर्फ मंदिर तक सीमित नहीं - यह हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा हैं। खेत में बीज बोने से पहले आशीर्वाद, बच्चे की पहली पढ़ाई,...