बहुत दिनों बाद आसमान दिखा , अपना नीला रंग ओढ़े , सदियों से मैं भूल गया था , असली रंग उसका , कभी सफ़ेद , कभी मैला , पर नीला कभी न देख पाया। धुप चम् चम् करती धरा को उज्जवल कर रही है आजकल, सूरज अपनी नौकरी कर अभी गया है, नीली चादर ओढ़े आसमान आज सर पर पढ़ा है । पंछी , बादल सब खेल रहे है तेरे नीले रंग से , बहुत दिनों बाद लौटी है कोयल की कूंक !! आज पहली बार सड़क इतनी चौड़ी लगी है रास्ते सुनसान सी नींद मै सो रहे है , कबूतर झुण्ड मैं उसपर दाना ढून्ढ रहे है , कुत्ते भौंकते हुए उनको पकड़ने की कोशिश में , दूर भौंक कर निकल जाते है , घर के सामने का पेड़ आजकल बहुतो का डेरा है, शाम को इनकी आवाज उसको जवा कर देती है पेड़ के पत्ते दिन भर , हवा के जोर से हिलते और ठहरते रहते है , , आँख मैं मोतिया होते हुए भी नजर दूर तक चली जाती है । शहर में एक नया डर आया है , फरमान है कि अब इंसान को इंसान से नहीं मिलना मौत का ,एक अदृश्य रूप खड़ा हो गया है मानवता के विरुद्ध , जो बिना दिखे अपनी मार , मारता है बस एक ही काट है , इंसा...
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