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युग पुरुष स्वामी मन्मथान । Charu Tiwari

स्वामी मन्मथन जी की आज पुण्यतिथि है। हमने 'क्रियेटिव उत्तराखंड-म्यर पहाड़' की ओर से हमेशा याद किया। हमने श्रीनगर में उनका पोस्टर भी जारी किया था। उन्हें याद करते हुये- हे ज्योति पुत्र! तेरा वज्र जहां-जहां गिरा ढहती गर्इ दीवारें भय की स्वार्थ की, अह्म की, अकर्मण्यता की तू विद्युत सा कौंधा और खींच गया अग्निपथ अंधकार की छाती पर तुझे मिटाना चाहा तामसी शक्तियों ने लेकिन तेरा सूरज टूटा भी तो करोड़ों सूरजों में। उनकी हत्या के बाद गढ़वाल में शोक की लहर दौड़ गर्इ। अंजणीसैंण (टिहरी गढ़वाल) में उनके द्वारा स्थापित श्री भुवनेश्वरी महिला आश्रम के आनन्दमणि द्विवेदी ने इस कविता से अपने श्रद्धासुमन अर्पित किये। कौन है यह ज्योति पुत्र! निश्चित रूप से स्वामी मन्मथन। इस नाम से शायद ही कोर्इ गढ़वाली अपरिचित हो। साठ-सत्तर के दशक में गढ़वाल में सामाजिक चेतना के अग्रदूत। एक ऐसा व्यक्तित्व जिसने सामाजिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक चेतना का रास्ता खोला। स्वामी मन्मथन ने गढ़वाल में सामाजिक चेतना के कर्इ आंदोलन चलाये। महिलाओं की शिक्षा, बलि प्रथा का विरोध, छुआछूत के ख्िालाफ चेतना, नशे के खिलाफ लोगों को...