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लोकमंच का लोकपर्व , समीक्षा ।।

उत्तराखडं लोक मंच का लोकपर्व ,   मेरा चिंतन  ।।

यह चिंतन मैं एक आम उत्तराखण्डी होने के नाते कर रहा हु, कार्यक्रम सफल था या असफल वह समाज का अपना निर्णय है , मेरी बात सिर्फ मेरे अपने सामाजिक  अनुभव तक सीमित है, मेरे आंकलन के अनुसार कार्यक्रम सुपर हिट था, क्योंकि होली मिलन से लेकर लोकपर्व  के अंतिम गाने "चैत की च्यातली" तक मैं नाचता रहा और इस से बढ़िया परिणाम क्या हो सकता
है । अब बात  इस लोकपर्व से सामाजिक सीख की ...
लोकपर्व की तैयारी के वक़्त कुछ नए लोगो से मिला , और यह लोग हमारे समाज के प्रतिष्ठित लोग थे ,  ऊत्तराखंड लोक मंच का बैनर था जिसके तले हम इस पर्व आयोजन का कार्य कर रहे थे , और यहाँ सब कार्यकर्त्ता की हैसियत से काम कर रहे थे, न कोई बड़ा था और न किसी के लिए कोई काम छोटा, सब का उद्देश्य सिर्फ इस आयोजन को सफल बनाना था , यह बात एक नजर से देखा जाय तो कोई  नई नहीं थी, परंतु अक्सर मैंने अपने समाज में देखा है कि इन नियमो की धज्जियां उड़ जाती है जब मंच, माइक और माला का सामना होता है। परंतु मैं आश्चर्यचकित हो गया यह सब महसूस करके जब इस प्रकार का कोई भी फरेब मुझे यहाँ नजर नहीं आया , इस पर्व के आयोजन के दौरान मैने जब कुछ ऐसे  महानुभावो के साथ  कार्य किया , तब मुझे लगा ,अक्सर समाज को कोसने वाले हम लोगो की नजर ऐसे हीरो पर कभी क्यों नहीं पड़ी ? पहली बार अपने समाज पर गर्व हुआ जब मेरे साथ बैकस्टेज मोमेंटो के डब्बो को एक स्थान से दूसरे स्थान, और एक जगह से दूसरी जगह कुर्सियां उठाने और मुख्य अतिथियो को उनके वाहन से सम्मानपूर्ण मंच तक ले जाने का कार्य यह महानुभाव कर रहे थे और इन पर गर्व होना लाजमी था क्योंकि यह कोई और नहीं पदम् श्री जसपाल राणा थे , दुनिया में भारत का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ी का यह रूप देख कर मैं बहुत प्रभावित हुआ । पर क्या यह अकेले थे यहाँ , एक और सज्जन जिनसे मेरी मुलाकात थोड़ी पुरानी है , वह walky टॉकी लेकर आयोजन को 3 और चार तारिख को पूरी तरह से मैनेज कर रहे थे , किसी कार्य मैं पीछे नहीं थे , बहुत ही खुशमिजाज व्यक्तित्व के धनी भाई संदीप शर्मा , अधिवक्ता दिल्ली हाई कोर्ट, लगा ही नहीं कही से भी की वो हमसे अलग है , अपने सामने वाले को वो सदा इज्जत और सम्मान देते है और वो चाहे कोई भी क्यों न हो , सतीश शर्मा जी , अभी दिल्ली पुलिस से सहायक आयुक्त पद से सेवानिवृत हुए है , संस्कृति से इतना लगाव है कि पहाड़ी संगीत पर अपने आप उनके पाँव थिरकने लगते है , उनके साथ पहाड़ी संगीत पर नाचने पर मजा आया , कही से नहीं लगा की पुलिस वाले भी इतने समाज प्रेमी हो सकते है। राजेंद्र बिष्ट जी आपसे भी मैं यही मिला और बहुत विषयो पर बात हुई और आपके सामाजिक दृष्टिकोण से बहुत प्रभावित भी हु ,  समाज के प्रति आपके सामाजिक रवैये से भी बहुत प्रसन्न हू । लक्ष्मी रावत जी , लेडी सुपर वूमेन , इन्ही तक नहीं अब बात इनके पुरे परिवार की , दलबीर सिंह रावत, प्रज्ञा और टोटो भाई ऐसा लगा जैसे इन्ही के परिवार की शादी है , हर काम मैं आगे , लक्ष्मी मैडम पुरे महीने से इस आयोजन की तैयारी में लगी थी और पिछले कुछ दिनों की नींद साफ़ उनके आँखों में दिख रही थी पर इसके बावजूद कही भी किसी भी कार्य मैं उनकी कोई कमी नहीं थी । पवन मैठाणी जी , मंच के पोलिटिकल  उदघोषक, हर प्रकार की जानकारी एकत्र कर रहे थे मेहमानों और कार्यक्रम के बारे में जिससे कोई भी स्टेज से खत्म सन्देश बहार न जाए , लक्ष्मी जी, मैथानी जी, और ओपी भाई के मंच संचालन ने कार्यक्रम पर चार चांद लगा दिए। पृथ्वी भाई , हँसमुख और बहुत व्यस्त कार्यकर्त्ता, देवेंद्र सजवाण भाई , चमोली भाई , खुशाल बिष्ट जी सरल व्यक्तित्व के धनी , सुनील कपूर्वाणं , सुरिंदर ध्यानी भाई, ईशु उप्रेती, तान्या उप्रेती , उर्मिला उप्रेती, याशिका, सुनील भाई की बिटिया, डंडरियाल भाई और प्रज्ञा आर्ट्स की कर्मठ टीम ...कुछ नाम मैं भूल भी सकता हु , इंसान हु पर इन सबसे जो सीखा वह अनमोल है मेरे लिए , और अंत में .......
इन सब को एक माला मैं पिरोया हमारे बड़े भाई बृज मोहन उप्रेती भाई ने ,  उनकी सूझ बूझ, सामाजिक अक्ल,  मेहनत  और व्यवस्था संचालन जिसके कारण यह कार्यक्रम आपके सामने निखर कर आया, यह प्रशंशा का विषय है , आनंद और शकून का विषय भी है , मेरे लिए और समाज के लिए ।
आखिर क्या कारण है की जिस समाज मैं अनेकता, आपसी टकराव और मनमुटाव प्रचलित है , यह टीम मिलकर ऐसा कार्यक्रम दे पायी , क्या समाज शास्त्रियों के लिए यह शोध का विषय नहीं होना चाहिए ? जब समाज के लोग अपने समाज से हर प्रकार की उम्मीद खो चुके है क्या यह कार्यक्रम एक नयी आशा की किरण नहीं दिखाता ?
कम से कम मुझे उम्मीद है अपने समाज से , जब उसमे इस प्रकार के हीरे मौजूद है तो फिर क्या चिंता, मुझे गर्व है मेरे समाज में ऐसे लोग है , मुझे इतने मिले है और आशा है बहुत आगे भी मिलेंगे , आखिर संस्कृति समृद्ध तभी तो है , यह है मेरा चिंतन और आंकलन इस कार्यक्रम और अपने समाज के प्रति , आप अपना दे , धन्यवाद ।।

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