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सामाजिक ऊत्तराखंडी , 2018 का ।

"सामाजिक उत्तराखण्डी" आज के समय का ।।

ऊत्तराखंड समाज और समाज के द्वारा बनाये गए अनगिनत  मंचों के इर्द गिर्द , आगे - पीछे  दाए - बाए  देखने , घूमने और इन मंचों पर होने  वाले क्रिया कलापो को देखने, समझने और  जानने का अवसर मिला । इनमें होने वाले कार्यक्रमो, वक्ताओं , समाजविदो  और सफल अभिव्यक्तियों से भी रूबरू होने का मौका मिला , कुछ आयोजन अच्छे थे , कुछ का मकसद अच्छा था पर मंचन सही ढंग से नहीं हो पाया , खैर जो भी है यह एक अलग दुनिया है , इस सफर के दौरान बहुत मित्रो से मिला , उनसे प्रभावित भी हुआ , और समाज में कुछ नया करने की पहल ने अच्छे समाज की कल्पना की उम्मीद को जिंदा रखा ।
       पर इस उज्जवल से दिखने वाले समाज का एक और खौफनाक चेहरा है जो कभी आपको सामने नजर नहीं आएगा परंतु आप उसे हर कदम महसूस करेंगे , एक प्रतिस्पर्धा अपने आपको चमकाने की, अपने आपको काबिलियत से ज्यादा दिखाने की , सदा चर्चा में रहने की, फोटोबाजी से दिखने की , यह आप तब देख पाते है जब आप मंच से दूर अंतिम पंक्ति में बैठे होते है और समाज के ये किरदार एक चलते हुए कार्यक्रम के दौरान प्रवेश करते है , यह हाल में प्रवेश करते ही सीधा अग्रिम पंक्ति में बैठने की कोशिश करते है , फिर अगर वह सीट न मिले तो आयोजक मंडल पर दबाव बना कर सीट हथियाने की कोशिश करते है , जैसे ही यह पंडाल में पहुचते है इनका नाम मंच से बुलाया जाना  चाहिए, अन्यथा ये नाराज हो सकते है, कार्यक्रम का उद्देश्य, मकसद क्या है इस से इनको कुछ नही लेना होता है , इनको सिर्फ मंच पर बुलाये जाने का इंतजार रहता है  यह सिर्फ मंच, माइक और माला के यार है , बाकी इनके लिए सब गद्दार है।  ज्यादातर अकेली प्रजाति के लोग होते है, क्योंकि ज्यादा समय तक किसी से बनती नहीं है ,  विचारधारा सिर्फ उस दिन के लिए उसकी अच्छी लगती है जो इन्हें या तो मंच, माइक और माला का सम्मान दे , अन्यथा भात खिला दे, एक बार अपने इनकी इन चीजों से सेवा करदी , उस दिन आप इनकी वाल पर फोटो पर छाये रहते है, बस नमक का कर्ज उसी दिन तक रखते है, अगले दिन किसी और के यहाँ।

परंतु जिस दिन आपने इनका ध्यान नहीं रखा बैठने के लिए कुर्सी नहीं दी, मंच पर माला नहीं पहनाई , उस दिन का हाल बड़ा विकराल हो जाता है , उस दिन धनुष टूटने के बाद पहुचने वाले परसुराम बन जाते है, फिर आपकी खैर नहीं, आपके आयोजन को दूकान कहा जायेगा, आंदोलन कारियो का अपमान करने के लिए आपको खूब भला बुरा कहा जायेगा , फेसबुक और सोशल मीडिया पर यह विरोधी गैंग आपका जीना हराम कर देगा , बात समाज , ऊत्तराखंड, गैरसैण , अंदोलंकारी से लेकर पता नहीं कहा कहा तक पहुच जायेगी ।आयोजन करता के तो  तोते उड़ जाएंगे , कि आखिर यह हुआ तो हुआ क्या ।
पर आयोजके मित्रो इनको पार्टी, विचारधारा, सोच, समाज  इनसे दूर दूर तक नहीं लेना देना , बस इनकी सेवा किये जाओ और आपको मेवा मिलती रहेगी ।ये वही लोग है जो आपको विचारधारा, धर्म, कुमाऊँ, गढ़वाल , ठाकुर , ब्राह्मण आदि आदि विषयों पर बाटने की कोशिश करेंगे।

समय आ गया है मित्रो , इन बहुरुपिए को पहचानने की चिन्हित करने की , और इनका बहिष्कार करने का, जिस से हमारे समाज का आपसी प्यार व सौहार्द बना रहे ।

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