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" चुनाव टाइम दिल्ली "



"चुनाव टाइम दिल्ली " दिल्ली देश की राजधानी है और क्योंकि भारत वर्ष मैं 29 राज्य है और  ज्यादातर चुनाव अलग अलग समय पर होते है इसलिए दिल्ली मैं इन चुनावो की हलचल रहती है , राष्ट्रीय पार्टियों तो अक्सर  हर तीन चार महीने के अन्तराल मैं चुनाव मोड पर आ जाती है , पांच राज्यों के चुनाव का अंतिम चरण जोरो पर है , उत्तरप्रदेश मैं अंतिम वोटिंग ८ मार्च २०१७ को है और पांच राज्यों के चुनाव का नतीजा ११ मार्च २०१७ को घोषित होगा ! सभी राष्ट्रीय और कुछ रीजनल दलों के लिए यह चुनाव काफी महत्वपूर्ण है ! उत्तराखंड के प्रवासियों के लिए भी यह चुनाव महत्पूर्ण है क्योंकि वो हर राज्य मैं राजनीतिक हिस्सेदारी की उपेक्षा सह रहे है और चुनाव ही उनको राजनीतिक हिस्सेदारी दिलवाने का सबसे महत्वपूर्ण जरिया है !

दिल्ली जो की देश की राजधानी है जिसकी जनसँख्या लगभग २.५० करोड़ का आंकड़ा पार कर चुकी है , यहाँ पर उत्तराखंडी मूल के लगभग ३० लाख लोग है और इस गणित के हिसाब से लगभग १२ प्रतिशत लोग उत्तराखंड के दिल्ली मैं बसर करते है , पर राजनीतिक हिस्सेदारी देखे तो वह कही नजर नहीं आती ! दिल्ली का कोई भी सांसद  उत्तराखंडी मूल का नहीं है और न ही कोई भी विधायक इस विधानसभा मैं उत्तराखंड समाज से आता है , यह कमी उत्तराखंड समाज को काफी समय से खल रही है जिसके कारण जब भी किसी प्रकार का सामाजिक आयोजन होता है अक्सर यह बात उभर कर सामने आती है , इस हिस्सेदारी को लेकर पिछले वर्षो मैं उत्तराखण्ड के लोग सडको पर भी आये , इस विचार को लेकर एक आयोजन १४ दिसम्बर २०१४ को दिल्ली के जंतर मंतर पर हुआ जिसमे उत्तराखंडी समाज के लोगो ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिए , एक गैर राजनीतिक संघठन " उत्तराखंड एकता मंच " का जन्म हुआ और इस मंच ने उपेक्षा झेल रहे उत्तराखंडी समाज के लोगो की बात को दिल्ली के राजनीतिक पटल पर रखने की कोशिश की , यह अपने मैं एक नायाब कोशिश की , ऐसा ही एक दूसरा आयोजन २० नवम्बर २०१६ को दिल्ली के रामलीला मैदान मैं हुआ , यह अब तक का सबसे भव्य सामाजिक आयोजन था , इसमें उत्तराखंड के युवावो , महिलाओ और पुरुषो ने बढ़ चढ़कर भाग लिया , सामजिक संस्थाओ का कार्य काफी काबिले तारीफ़ रहा , लगभग ३० हजार से ५० हजार उत्तराखंडी इस आयोजन मैं शरीक हुए और पहले बार लगा की उत्तराखंडी लोग एक आह्वाहन पर एक साथ खड़े भी हो सकते है ! इस आयोजन से क्या लाभ हुआ , उसमे न जाते हुए मैं यह जरुर कहना चाहता हु की सही नीयत से किया कोई भी आयोजन सफल होता है , वह इस भीड़ ने दिखा दिया , और एक नयी उम्मीद की किरण हर उत्तराखंडी को दिखी ! हमारा समाज जो की बदनाम है एक दुसरे की टांग खीचने के लिए , इस भीड़ ने इस किस्से को भी झुठला दिया ! आयोजन सफल हुआ और एक नयी उम्मीद बधी !
२०१७ का आगमन हुआ , उत्तरायनी का पर्व भी दिल्ली मैं धूम धाम से मनाया गया , पहले कुछ संस्थायो इसे अपने हिसाब और खर्चे से करती थी अब दिल्ली सरकार भी इसमें सहयोग करने लगी है ,इस से यह एक बड़ा लाभ हुआ है की धूमिल होती हमारी संस्कृति को इस रामबाण ने नया जीवन दे दिया है , और भी बहुत सामाजिक काम हो रहे है , यह कार्य पहले भी होते थे परन्तु इतने विशाल रूप मैं पहली बार हुए , इस बीच उत्तरखंड के चुनाव हुए , इन चुनावो का परिणाम अभी मत पेटी मैं बंद है होली से दो दिन पहले यह परिणाम आएगा , सरकार किसकी बनेगी वह उस दिन साफ़ होगा !
इस बार दिल्ली के लिए यह सब ख़ास इसलिए भी हो जाता है , क्योंकि दिल्ली मैं नगर निगम चुनाव आ गए है  २७२ वार्ड मैं चुनाव होने है और २७ अप्रैल २०१७ से पहले यह चुनावी प्रक्रिया शुरू हो जाएगी ! दिल्ली नगर निगम मैं बीजेपी और कांग्रेस मुख्य पार्टिया है और आम आदमी पार्टी के लिए यह पहला निगम का चुनाव है इन राजनीतिक पार्टियों के अलावा स्वराज पार्टी भी अपने उम्मीदवार खड़े कर रही है ! आम आदमी पार्टी ने अपने १०९ उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है और जिसमे ४ उत्तराखंडी लोगो को भी इस पार्टी ने टिकट दी है और यह उम्मीद अभी बरक़रार है की और उम्मीदवारों को यह पार्टी टिकट देगी ! बीजेपी और कांग्रेस से भी यही उम्मीद की जा रही है की यह राष्ट्रिय दल भी इस बात को टिकट वितरण के समय संज्ञान मैं रखेंगे ! उत्तराखंड क्रांति दल भी इस बार इन चुनावो मैं अपने उम्मीदवार खड़े कर सकता है !

यह राजनीतिक दल अपने उम्मीदवार खड़े करने का कार्य शुरु कर चुके है और उम्मीद है की हमारे समाज के लोगो को भी टिकट मिलेगा ! अब जो सबसे बड़ी जिम्मेवारी समाज के ऊपर है की , कैसे इन उम्मीदवारों को जिताया जाय , क्योंकि राजनीतिक दलों ने जो दाव  हम लोगो पर लगाया है अगर हम लोग इन उम्मीदवारो के सर पर जीत का शेहरा बाधकर निगम मैं भेजते है तो आगे के लिए भी रास्ता खुल जाता है और फिर राजनीतिक दलों के लिए यह जरुरी हो जायेगा की हमारे समाज के ज्यादा से ज्यादा लोगो के टिकट से नवाजा जायेगा और राजनीती को एक करियर के रूप मैं देखने वालो हमारे समाज के युवा , इस फील्ड मैं भी आगे बढ़ेंगे !
इस बार का यह चुनाव हमारे समाज के लिए भी परीक्षा की एक घडी है अगर हम इसमें पार पा लेंगे तो उपेक्षा का यह दौर ख़त्म हो जायेगा अन्यथा यह दौर चलता रहेगा ! इसलिए सभी सामाजिक संस्थाओ ,और समाज के लोगो को सोचना और समझना है की कैसे इस अवसर का लाभ उठाना है ! अपने बारे मैं न सोचकर समाज के बारे मे सोचने का वक़्त है और अपने समाज के लोगो को निगम मैं पहुचाना है , यही उम्मीद आप सबसे है ! 

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