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दिल्ली निगम चुनाव , एक चुनौती उत्तराखंड समाज के लिए !



उत्तराखंड के चुनाव का गणित मत पेटी मैं बंद है और दिल्ली के नगर निगम चुनावो की गहमा गहमी शुरू हो गयी है , दिल्ली की जाती हुए शर्दी इसलिए भी गर्म लग रही है क्योंकि चुनावो का मौसम जो चल रहा है ,  हम जैसे सोशल मीडिया के स्टेटस को अपनी दिल की धड़कन समझने वाले लोगो के लिए बहुत कुछ कहने , सुन ने , झगड़ने और कही कही तो गलियाने के लिए ये चुनाव बहुत कुछ दे जाते है , चुनाव के मौसम मैं नए दोस्त और नए दुश्मन दोनों मैं वृद्धि होती है , ऐसा ही मौसम इस होली दिल्ली मैं रहने वाला है , जब भी चुनाव के बीच मैं कोई त्यौहार पड़ता है उस त्यौहार के हिट होने के सबसे ज्यादा चांसेस होते है और ऐसा ही कुछ इस बार होली मैं दिखने वाला है ! उत्तर प्रदेश के चुनावो ने माहौल को वैसे ही गर्म करके रखा हुआ है , दिल्ली विश्व विद्यालय मैं "देश द्रोही" और "देश प्रेमी" और "आज़ादी "के नारे फिर से लगने लगे है ,मुंबई के बृहन मुंबई कारपोरेशन के चुनावी नजीते बीजेपी के लिए बहुत मजबूत सिद्ध हुए है , पर उत्तर प्रदेश के बचे हुए चरण के चुनावो मैं कितना प्रभाव डालेंगे  यह तो वक़्त ही बताएगा , परन्तु मोदी जी , अमित शाह और अन्य बीजेपी के नेताओ के भाषणों मैं जरुर इन परिणामो की गर्मी दिखने लगी है !
दिल्ली देश की राजधानी है इसलिए यहाँ किसी भी प्रकार की राजनीतिक प्रतिस्पर्धा पुरे देश पर असर डालती है और नगर निगम के चुनाव ऐसा ही कुछ करने वाले है , दिल्ली मैं आम आदमी पार्टी की सरकार है और केंद्र मैं  बीजेपी की सरकार और इनका आपस मैं जो छत्तीस का जो आकंडा है वह किसी से छुपा नहीं रह गया है , अकसर अखबार इन प्रकार की खबरों से भरे रहते है और हम जैसे सोशल मीडिया के सेवक फिर इन सब बयानों की खाल उतार कर इनमे से रहा सहा जूस चूसते है , इन्हें  भुनाते  है और इन मुद्दों को आसानी से मरने नहीं देते है !
दिल्ली के चुनावी रण का बिगुल बज चुका है आम आदमी पार्टी , कांग्रेस और बीजेपी के अलावा इस बार स्वराज अभियान भी इस चुनाव के मैदान मैं होगा , स्वराज पार्टी भी सभी निगम के वार्डो मैं अपने उम्मीदवार उतारने का कार्य शुरू कर चुकी है , इस बार यह टक्कर तिकोनी लगती  है ! आम आदमी पार्टी ने १०९ उम्मीदवार की पहली सूची जारी कर दी है जिसमे से ४ उम्मीदवार उत्तराखंड से ताल्लुक रखते है , यह एक नया अध्याय है जो दिल्ली के उत्तराखंडी समाज के इतिहास मैं जुड़ रहा है ! राजनीतिक उपेक्षा की मार झेल रहा यह समाज पिछले कुछ वर्षो से अपनी इस उपेक्षा की लडाई को कई बार जंतर मंतर और रामलीला मैदान  ले जा चूका है , पिछले कुछ वर्षो मैं सामाजिक संगठनो ने भी इस बात को मंच और  माइक से बराबर उछाला है , राजनीतिक हिस्सेदारी की लडाई अब नए मुकाम पर पहुच गयी है और यही हाल रहा तो , इस बार के नगर निगम चुनावो मैं इसका प्रभाव साफ़ दिखने वाला है ! 
राजनीतिक पार्टी अपना काम करेंगी , पर समाज का क्या दायित्व है ?  हमारे समाज के लोगो को टिकट मिल गयी है क्या समाज का काम वही ख़त्म हो जाता है ? या फिर इन उम्मीदवारों की जीत मैं भी हमारा कुछ योगदान रहेगा  ? यह सभी प्रश्नों का जवाब भी समाज को ढूढना होगा , तभी हम राजनीतिक हिस्सेदारी की लडाई को जीत सकते है ! राजनीतिक पार्टी ने अपना फर्ज टिकट देकर निभाया है और उम्मीदवार ने अपनी योग्यता दिखाकर ,और अब समाज की बारी है इन सभी उम्मीदवारों की जीत के लिए सिलसिले वार तरीके से काम करके , क्योंकि दिल्ली के चुनाव की बात है तो फिर हमें सबसे पहले अपने समाज से उठ कर सर्वसमाज की बात करनी होगी , उस क्षेत्र की परेशानियों के बारे मैं बात करनी होगी , इन सभी मुद्दों को क्रमबद्ध तरीके से समझना और उनका समाधान  निकालना होगा , उत्तराखंड के नव युवक को इस चुनाव मैं बड़ी मेहनत से काम करना होगा !
विधायक और सांसद के चुनाव मैं अगर हमें किसी भी प्रकार का प्रतिनिधित्व चाहिए तो इन निकाय चुनावो मैं हमें अपनी ताकत का एहसास देश के राजनीतिक तंत्र को दिखाना होगा तभी राष्ट्रीय स्तर पर हम सब की पूछ होने वाली है ! बहुत से कारण है जो हमारी इस राजनीतिक उपेक्षा का कारण बने नेपथ्य मैं , उनसे सीख कर हमें इस चुनाव को देखना पड़ेगा , वह गलतिया सुधारनी पड़ेंगी और समाज को एकत्रित करना पड़ेगा ! अब समय है अपने छोटे मोटे लालच से बाहर निकल कर एक विकसित समाज का निर्माण करने की , अब यह राजनीतिक पार्टिया हमें वह अवसर दे रही है , हमें इस अवसर को गवाना नहीं चाहिए , किन्तु , परन्तु , बदला ,द्वेष शब्दों को भूलकर काम पर लग जाना चाहिए और पार्टी कोई भी हो , पर भाई या बहन अपनी है अगर ये जीतते है तो मेरा समाज आगे बढ़ता है इसी सोच के साथ इस चुनाव का परिणाम बदलना है !

जय भारत , जय उत्तराखंड !




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