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उत्तराखंड एकता मंच , एक जुट -एक मुठ , 20 नवम्बर , रामलीला मैदान , नयी दिल्ली !!

उत्तराखंड एकता मंच "एक जुट - एक मुठ " सम्मलेन 20 नवम्बर 2016. रामलीला मैदान , नयी दिल्ली
"मेरी समीक्षा "
20 नवम्बर 2016 का यह दिन उत्तराखंड एकता मंच की एक ऐतहासिक पहल को क्रियान्वित करने का दिन था ! लगभग एक साल की मेहनत के बाद आज का यह भव्य आयोजन यह दरसाने वाला था की समाज किस प्रकार से उत्तराखंड एकता मंच के इस आवाहन को समझने वाला है ! मंच की तरफ से युवा मित्रो ने कमर तोड़ मेहनत कर काफी श्रम किया था और उस आयोजन की सफ़लता की उम्मीद लिए मैं भी रामलीला मैदान सुबह ११ बजे पहुच गया था !
रामलीला मैदान पीले रंग की चादर से सजा हुआ था , चारो तरफ युवा साथी पीली टी शर्ट मैं और कैप लगाकर ;व्यवस्था पर लगे हुए थे , मेरे साथ साथ दो बसों के लोग , झंडे , नांगर - निसान और ढोल दमुआ के साथ नाचते गाते और एक जुट और एक मुठ के नारे लगाते पंडाल मैं प्रवेश कर रहे थे , माहौल काफी खुशनुमा और एक बड़े पर्व की तरह लग रहा था , पंडाल मैं महिलाओ और पुरुषो की बैठने की अलग - अलग व्यवस्था की हुई थी , दूर बहुत बड़ा स्टेज बंद हुआ जिसमे उत्तरखंड एकता मंच का बेक ड्राप लगा हुआ था ! मैं पंडाल को पार करते हुए सीधा अति विशिस्ट लोगो के पंडाल मैं पहुच गया , वैसे मैं कोई स्पेशल आदमी नहीं हु पर क्योकि दो दिन तक मैं भी गडवाल भवन के वार रूम मैं गया था इसलिए यह कृपा मुझ पर हो गयी , कार्यक्रम की शुरुवात राहुल सती की प्रार्थना से शुरू हुआ और लोगो की आवाजाही शुरू हो गयी , विशिष्ट अथितियो के स्टाल के प्रवेश पर बाउंसर भी खड़े थे और वह सिर्फ एंट्री पास वाले लोगो को ही दे रहे थे , स्टाल मैं मुझे साहित्यकार पूरण चन्द्र कांडपाल जी मिले और उनसे मुलाकात के बाद मैं अपनी सीट पर बैठ गया , धुप खिली हुई थी और मौसम काफी उम्दा था ! आयोजन मैं हीरा सिंह राणा जी , कौशल पाण्डेय जी , नरेंदर सिंह नेगी , और बहुत संस्कृत प्रेमी सम्मिलित हुए , स्टेज पर कार्यक्रम एक के बाद एक चलने लगे !
, मंच सञ्चालन का कार्यभार हमारे अजीज मित्र आजाद सिंह नेगी जी के हाथ मैं था , और वर्ष 2014 के सम्मलेन मैं भी उन्होंने मंच का सञ्चालन किया था , मेरे पंडाल मैं उत्तराखंड समाज के वो सभी वो लोग लगभग उपस्थित थे जो हर सामाजिक आयोजन मैं होते है , रह रह कर लोग अपने अनुमान लगा रहे थे की कितनी भीड़ पंडाल मैं है , क्या उत्तराँचल एकता मंच अपने इस आयोजन मैं सफल हुआ है या नहीं ? इन सब बातो के दौरान मंच मैं कार्यक्रम चल रहे थे , बच्चो ने बहुत सुन्दर सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया , फिर उसके बाद अभिनेता और उद्यमी प्रकाश बिष्ट ने बड़े पुरजोर तरीके से अपनी बात रखी. कैसे उत्तरखंड के पिछड़ेपन को दूर किया जा सकता है उस पर उन्होंने अपनी बात रखी ! पंडाल मैं एक अलग प्रकार की सुगबुगाहट चल रही थी !
नरेंदर सिंह नेगी जी के आगमन से सेल्फी का दौर शुरू हो गया लोग उनके साथ खड़े होकर उनके साथ सोफे मैं बैठकर फोटो खिचवाने मैं लगे हुए थे , वह एक झुण्ड सा लग रहा था , तभी मशहूर उद्यमी चन्द्र बल्लभ टम्टा जी का आगमन हुआ और उन्हें भी नरेंदर सिंह नेगी जी के बगल मैं अग्रिम सोफे पर बिठा दिया ! हीरा सिंह राना जी कौशल पाण्डेय जी के साथ पहली पंक्ति के पीछे वाले सोफे पर बैठे थे और वह भी अब नरेंदर सिंह नेगी जी के साथ वाले सोफे मैं आकर बैठ गए ! मंच का सञ्चालन करने के लिए आजाद सिंह नेगी जी के साथ शशि मोहन कोटनाला जी पहुच चुके थे उन्होंने अपना संबोधन काफी कड़क चार पंक्तियों से किया और पंडाल मैं जोश -खरोश ला दिया , आजाद भाई दिल से बात करते है और उनका लहजा बिलकुल अलग सा है जो मुझ जैसे सामान्य व्यक्ति को भाता है ! इस के बाद युवा नेता और समाज सेवी दिग्मोहन नेगी जी ने अपनी बात रखी उनका विषय था पलायन और उन्होंने बड़े सरल ढंग से जनमानस को बताया की पलायन से होने वाले कौन कौन से नुक्सान है , कम शब्दों मैं अपनी बात को रखना कोई दिग्मोहन भाई से सीखे ! कार्यक्रम अपने चरम पर था और पंडाल मैं संख्या लगभग २५००० पार कर चुकी थी और लोगो का ताँता लगा हुआ था ! रंगकर्मी मुकेश कठैत जी ने अपनी संगीतमय प्रस्तुति दी , फिर मंच पर प्रसिद्ध समाजसेवी रौशनी चमोली जी ने अपने शब्दों के माध्यम से जनमानस को जागृत किया , कैसे हम उत्तराखंड को विकास की और ले जा सकते है उस पर और महिला शक्ति का परिपक्कव उत्तरखंड बनाने मैं योगदान पर बात की ! नरेंदर सिंह नेगी जी ने धर्मदाद दी और पूरा पंडाल अपने कदमो पर खड़ा होकर संगीत की हिलोरो मैं नाचने लगा ! इसके बाद इस आयोजन के कर्णधार माननीय विनोद बछेती जी ने उत्तराखंड एकता मंच के उद्देश्य के बारे मैं सबको बताया , बछेती जी के योगदान के कारण ही यह विशाल आयोजन हो पाया है ! प्यारा उत्तरखंड के देव सिंह रावत ने भी अपनी बात रखी , फिर हीरा सिंह राणा जी और कौशल पाण्डेय जी ने मंच संभाला और अपने गीतों से लोगो को फिर पंडाल मैं नाचने पर मजबूर कर दिया ! इस बीचे हमारे युवा मित्र सुरेंदर सिंह हलसी जी ने युवा तरीके से मंच से कहा की एकता मंच गैरसैंण राजधानी के लिए प्रयासरत है और संघर्ष करता रहेगा ! इस कायक्रम के थिंक टैंक विनोद बिष्ट ने संगठित समाज के फायदे लोगो को बताये और उसके बाद दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया साहब ने उत्तराखंड अकादेमी के सन्दर्भ मैं भी घोषणा की , मनीष जी को एकता मंच की पीली टी शर्ट मैं देख कर काफी ख़ुशी हुई !
किसी कारण वस उतराखन्ड् के मुख्यमन्त्रि तो न पाये लेकिन् उनके साथी प्रतिनिधि के रुप् मे भाइ नन्दन् सिह् रावत जी ने फोन् के दवरा उनके भाषण् को जनता को सुनवया । उद्यमी चन्द्र बल्लभ तमता जी ने कहा की मंच किसी भी राजनीतिक पार्टी का समर्थन नहीं करता , परन्तु वह अपने उम्मीदवार खड़े कर सकता है समय आने पर , जिसका खंडन आजाद सिंह नेगी करते नजर आये अंत मैं विनोद बिष्ट जी ने सभी वालंटियर्स का धन्यवाद दिया और यह आयोजन अपने अंत की और चल पड़ा !
आयोजन काफी सफल रहा , परन्तु क्योकि हम उत्तरखंड समाज के है इसलिए हम आयोजन को तभी सफल मानते है जब उस आयोजन मैं हमें मंच पर बुलाया गया हो , हमें माइक दिया गया हो , और हमारा पूर्ण सम्मान दिया गया हो , अन्यथा सब कुछ असफल है ! इस प्रकार की गहमा गहमी , अति विशिस्ट पविलियन मैं नजर आई , परन्तु आम जनमानस इन सब से दूर एकता मंच का कार्यक्रम देखने मैं मस्त था !
मेरे समाज के बहुत लोग इस आयोजन की सफलता से खुश नहीं है, क्योकि वो मंच पर उन्हें नहीं बुलाया गया ! अति विशिस्ट पविलियन मैं ज्यदातर लोग सेल्फी और फोटो खिचवाने मैं मस्त थे , मंच से क्या कहा जा रहा था उसपर न कोई उनकी रूचि थी और न ध्यान ! पहले नरेंदर सिंह नेगी जी के चारो तरफ लोग झुण्ड बना कर खड़े थे , उसके बाद जैसे ही मनीष सिसोदिया जी आये उनके चारो तरफ लोग खड़े हो गए और फोटो खिचवाने लगे , इन लोगो को पंडाल मैं पीछे बैठे लोगो की कोई चिंता नहीं थी ,न वो वालंटियर की सुन रहे थे और न ही सिक्यूरिटी की , सिक्यूरिटी तो पहाड़ के कार्यक्रमों मैं होनी ही नहीं चाहिए , क्योकि सब बिना पास के प्रवेश कर रहे थे , और बेचारे सिक्यूरिटी वालो का बुरा हाल था ! खैर ये मेरे समाज की बात है जो सदा रहेगी , क्योकि लडाई नेतृत्व की नहीं है लडाई है कैसे इस समाज को इकठ्ठा रखा जाय !
उत्तराखंड एकता मंच का यह आयोजन बहुत सफल रहा और मुझे भी एक बड़ी उम्मीद अपने समाज से बनी है और मेरे समाज के लोग सामजिक मुद्दों पर एकत्रित होने के लिए अभी भी तैयार है जो को एक बहुत बड़ी उपलब्धि है ! इस प्रकार का भव्य सामाजिक आयोजन पिछले कई वर्षो मैं कभी नहीं हुआ , शायद यह पहला आयोजन है जब उत्तरखंड समाज के लोग एक आव्हान मैं साथ आये ! इस आयोजन के लिए मैं युवावो को ख़ास तौर पर धन्यवाद देना चाहता हु और मुख्य रूप से अनिल पन्त जी , देव सिंह रावत जी , मनोज आर्य , अमित गुसाईं , पटवाल जी, राहुल , वार रूम की पूरी टीम, संजय नौडियाल भाई , दिग्मोहन नेगी ,जी शशि मोहन कोटनाला जी , विनोद बिष्ट जी , आजाद सिंह नेगी जी , विनोद बछेती जी , राजन पाण्डेय जी , कौशल पाण्डेय जी. पृथ्वी रावत जी , सुरेंदर हलसी जी , अनिल कुकरेती जी , गोपाल रावत जी , प्रताप थलवाल, राजेंदर पवार,एम के द्विवेदी नेगी भाई , राकेश रावत जी , हंसा अमोला जी , प्रेमा धोनी जी इन सब का धन्यवाद देना चाहता हु , कुछ नाम छूट भी गए होंगे , उनसे माफ़ी और मेरे समाज के इस भव्य आयोजन के लिए पुरे उत्तराखंडी समाज को बधाई !!!!


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