सितम्बर की सुबह का अपना एक मजा है , एक तरफ भीनी - भीनी से ठंडी हवा आपके चेहरे और बालो को छूते निकल जाती है और पास के स्कूल से " वन्देमातरम" की आवाज आपको अपने देश के प्रति कर्तव्य की याद दिला देती है , तभी नीचे से " कबाड़े-कबाड़े " की आवाज करता कबाड़े वाला अपने काम की और निकालता है और पेड़ मैं बैठा कव्वा भी जोर से काव -काव करने लगता है !
मंगलवार की सुबह , फ़ोन खोलते है धडल्ले से दर्जनों व्हाट्स अप्प मेसेज आपके इनबॉक्स मैं जबरन घुश आते है , उनमे से कुछ चुटकले है , कुछ हमें और भारतीय बन ने की सीख देने वाले मेसेज है , क्योकि आज मंगलवार है इसलिए हनुमान जी आज कुछ समय तो मुख्य शेयर का कारण रहेंगे इसलिए हनुमान भक्तो ने हनुमान जी की बड़े - बड़े चित्र इन व्हाट्स ग्रुप्स मैं डाले है , तकनीक का यह फायदा है , आपको यहाँ मंदिर , मस्जिद गुरुद्वारे सब मिल जायेंगे आपको कही जाने की जरुरत नहीं पड़ेगी !
शीना बोरा मर्डर केस मैं आज सबको पता चल गया है की इन्द्राणी मुख़र्जी शीना बोरा की माँ है , इतने दिनों के सस्पेंस के बाद आखिर पुलिस ने ये गुत्थी सुलझा ही ली है , परन्तु हमारे देश के कर्मठ पत्रकारों ने तो पहले ही दिन इस पर से पर्दा उठा लिया था , मैं कभी सोचता हु जिस प्रकार से हमारे देश की मीडिया इन हाई प्रोफाइल केसेस मैं अपनी रूचि दिखाती है उस से लगता है मीडिया को ही ये सब केस निवारण के लिए दे देने चाहिए , क्योकि वैसे भी हमारे देश की मीडिया को आत्महत्या करते किसानो औरनियंत्रण रेखा पर शहीद होने वाले जांबाज़ सैनिको के लिए समय कहा , वो तो पिछले लगभग २० दिनों से शीना बोरा मर्डर केस मैं शीना बोरा का फॅमिली ट्री बनाने मैं व्यस्त है !
जैसे ही अब इन्हें यहाँ से समय मिलेगा वैसे ही यह मोदी जी और केजरीवाल जी के पीछे लग जाएगी और फिर वही आरोप - प्रत्यारोप की बारिश ! मीडिया भारत की कितनी स्वंत्र है इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते है की मीडिया मैं सिर्फ राजनीती और बॉलीवुड की खबरों के अलावा किसी और समाचार जो जगह नहीं मिलती ! आन्दोलन कर रहे पूर्व सैनिको को मीडिया ने कोई तवज्जो नहीं दी , इन मैं बहुत सैनिको ने भूख हड़ताल भी की है परन्तु उस पर इतना कोई बवाल नहीं खड़ा हुआ क्योकि मीडिया के अपनी सीमाए है और वो उन सीमओं को कभी नहीं लांघती !
अभी दो दिन पहले टीचर्स डे गया है और जब से नए प्रधान मंत्री आये है उनकी पहल से इसका दिवस का महत्व काफी बढ़ गया है अब वो हर साल पुरे भारत के विद्यार्थियों से विडियो पर बात करते है और उनका ज्ञान और अपना ज्ञान चेक करते है , क्लाइमेट बदलाव के ऊपर हमने अपने प्रधानमंत्री की बात सुनी और वही सुना है ओबामा साहब भी क्लाइमेट बदलाव लेकर काफी चिंतित है , परन्तु हमारे प्रधानमंत्री साहब ने तो सीधा कह दिया है की क्लाइमेट बदलाव नाम की कोई चीज नहीं है , यह तो हम बदल गए है इसलिए हमें ऐसा लगता है ! सच ही कह रहे होंगे अगर प्रधानमंत्री कह रहे होंगे तो , ये प्रयावरण विद तो सिर्फ जनता को डराते रहते है , जैसे वो सुबह सुबह टीवी पर बाबा लोग डराते है की ये नहीं करोगे तो राहू नाराज हो जाएगा वो नहीं करोगे तो केतु नाराज हो जाएगा , इसलिए हमारे प्रधानमत्री साहब ने कम से कम ये क्लाइमेट बदलाव का दर तो हमारे मन से निकल दिया है !
बिटिया को स्कूल छोड़ आया हु , सोचा घर जाकर सीधा अखबार पडूंगा पर चैन कहा , ये गैस का सिलिंडर ख़तम हो गया है और श्रीमती जी रसोई से गुस्सा राग अलापने पर लगी हुई है सब्जी आधी कच्ची और आधी पक्की गैस पर सवार है लेकिन अब क्या हो सकता है , सब्जी तो पक नहीं सकती पर पति को तो पका सकती है , और वही चालू है , वैसे अब मेरे पास उनकी खरी -खोटी सुन ने के अलावा कुछ और आप्शन भी नहीं है क्योकि आखिर गलती तो मेरी ही है पिछले एक महीने से सिलिंडर बुक नहीं करवाया है , इसलिए ये तो सुनना पड़ेगा ! आज इसी खरी खोटी से काम चलाना पड़ेगा , क्योकि अब न चाय बन सकती है और न खाना !
अख़बार खोलता हु तो उसमे वही सब छाया हुआ है , बस नया यह है की अब पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष भी लडाई के लिए तैयार है , ये पाकिस्तान पूरी समय लडाई के लिए तैयार रहता है जब लडाई होती है चाहे वह १९६५ मैं हुई हो या १९७१ मैं , लडाई के समय दम दबा के बिल मैं घुस जाता है और फिर जैसे ही लडाई ख़तम होती है फिर गीदड भभकिया देने लगता है , क्यों नहीं एक बार किसी स्टेडियम बुक करवा कर इनकी सेना को यहाँ बुला लिया जाय और फिर इनके काम पर धर दिया जाय रोज वही लडाई इसके अलावा कुछ नहीं , अबे अपनी अन्दुरूनी लडाई ख़तम कर नहीं सकते , बस रोज हिंदुस्तान को अपने नुक्लेअर ताकत दिखाते रहता है , जैसे हमारे पास तो दिवाली के बम रखे होंगे , अबे अगर अपनी पर आ गए तो हमारे मुर्गा छाप बम ही पाकिस्तान का काम तमाम कर देंगे !
पाकिस्तान को गाली देकर सीना चौड़ा हो जाता है , क्योकि वो करता ही ऐसा है , लेकिन तभी याद आता है मैं घर मैं हु और घर मैं एक और शेरनी सुबह से गुर्रा रही है तभी उनकी गुर्राहट सुनकर एक दम सीना अन्दर हो जाता है और मैं फिर घर मैं व्यस्त हो जाता हु , तभी फ़ोन की घंटी बजती है और पता चलता है की ऑफिस की प्रेजेंटेशन सुबह १० बजे है , लो अब एक नयी मुसीबत , और दिन ऑफिस ११ बजे तक जाता हु आज इस प्रेजेंटेशन के चक्कर मैं सुबह ही पहुचना होगा !
आपने क्या सोचा बड़ी सुकून वाली सुबह होती होगी दिल्ली वालो की ...आप का अंदाज बिलकुल गलत निकला ,
बिटिया को स्कूल छोड़ आया हु , सोचा घर जाकर सीधा अखबार पडूंगा पर चैन कहा , ये गैस का सिलिंडर ख़तम हो गया है और श्रीमती जी रसोई से गुस्सा राग अलापने पर लगी हुई है सब्जी आधी कच्ची और आधी पक्की गैस पर सवार है लेकिन अब क्या हो सकता है , सब्जी तो पक नहीं सकती पर पति को तो पका सकती है , और वही चालू है , वैसे अब मेरे पास उनकी खरी -खोटी सुन ने के अलावा कुछ और आप्शन भी नहीं है क्योकि आखिर गलती तो मेरी ही है पिछले एक महीने से सिलिंडर बुक नहीं करवाया है , इसलिए ये तो सुनना पड़ेगा ! आज इसी खरी खोटी से काम चलाना पड़ेगा , क्योकि अब न चाय बन सकती है और न खाना !
अख़बार खोलता हु तो उसमे वही सब छाया हुआ है , बस नया यह है की अब पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष भी लडाई के लिए तैयार है , ये पाकिस्तान पूरी समय लडाई के लिए तैयार रहता है जब लडाई होती है चाहे वह १९६५ मैं हुई हो या १९७१ मैं , लडाई के समय दम दबा के बिल मैं घुस जाता है और फिर जैसे ही लडाई ख़तम होती है फिर गीदड भभकिया देने लगता है , क्यों नहीं एक बार किसी स्टेडियम बुक करवा कर इनकी सेना को यहाँ बुला लिया जाय और फिर इनके काम पर धर दिया जाय रोज वही लडाई इसके अलावा कुछ नहीं , अबे अपनी अन्दुरूनी लडाई ख़तम कर नहीं सकते , बस रोज हिंदुस्तान को अपने नुक्लेअर ताकत दिखाते रहता है , जैसे हमारे पास तो दिवाली के बम रखे होंगे , अबे अगर अपनी पर आ गए तो हमारे मुर्गा छाप बम ही पाकिस्तान का काम तमाम कर देंगे !
पाकिस्तान को गाली देकर सीना चौड़ा हो जाता है , क्योकि वो करता ही ऐसा है , लेकिन तभी याद आता है मैं घर मैं हु और घर मैं एक और शेरनी सुबह से गुर्रा रही है तभी उनकी गुर्राहट सुनकर एक दम सीना अन्दर हो जाता है और मैं फिर घर मैं व्यस्त हो जाता हु , तभी फ़ोन की घंटी बजती है और पता चलता है की ऑफिस की प्रेजेंटेशन सुबह १० बजे है , लो अब एक नयी मुसीबत , और दिन ऑफिस ११ बजे तक जाता हु आज इस प्रेजेंटेशन के चक्कर मैं सुबह ही पहुचना होगा !
आपने क्या सोचा बड़ी सुकून वाली सुबह होती होगी दिल्ली वालो की ...आप का अंदाज बिलकुल गलत निकला ,
ऐसी है दिल्ली की हर सुबह सुबह दिल्ली की सुबह ऐसी ही सुबह हो इसलिए सब पढाई और पलायन किया था , बिलकुल भी अपने लिए समय नहीं है और अब तैयार होकर जल्दी ऑफिस के लिए निकलना पड़ेगा क्यों अभी ट्रैफिक जैम भी है , , और यह जाम याद दिलाता है आधुनिक वायरस की जो हमें सबको रोज परेशान करता है और वह है ट्रैफिक का वायरस , रोज हमें डेढ़ से दो घंटे सड़क पर खड़ा रखता है , कभी ये कारण तो कभी वो कारण , परन्तु ट्रैफिक खिसकने का नाम नहीं लेता इसी डर के मारे उठ रहा हु और निकलता हु ऑफिस को नहीं तो मन की शान्ति क्रांति मैं बदल जायेगी और यह सितम्बर की भीनी भीनी हवा तीखी लगने लग जाएगी !

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