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उत्तराखंडी बचपन !



इस बार जब  गाँव गया , सोच रहा था बहुत बदल  गया होगा गाँव, लोग चारो तरफ विकास , सड़क, मोबाइल , गाडियों  की बात करते है , सोचा शायद पहाड़ ने सब कुछ बदल दिया हो, परन्तु जब गाँव पंहुचा तो सब वही पाया जो हमारे  बचपन मैं होता था , पहाड़  शायद बहुत बदल गया हो , लोग  बदल गए हो , परन्तु बचपन अभी भी वही का वही है , वो गाय-बछड़े से  प्यार , वो खेत खालिहान अपना क्रिकेट का मैदान , बच्चे सचुमुच कभी नहीं  बदलेंगे ! कोयले की जगह चाहे टूथ पेस्ट और ब्रश ने ले ली हो , परन्तु सही है तो वैसा ही !

ब्रश के बाद सीधा गौशाला , गाय और बैल चले गए है जंगले चरने , अब बछड़े का पूरा भार मेरे पर आ गया है , अब  मेरा फ़र्ज़ बनता है उसे घास खिलाना , लेकिन उसकी मैं अभी से गन्दी आदत नहीं डालना चाहता इसलिए , मैं चाहता हु की घास की हर पत्ती के लिए वो मेहनत करे इसलिए उसे दौड़ा - दौड़ा कर खाना खिला रहा हु !

अब बछड़े को भी खाना दे दिया है , अपने काम से फारिक हो चला हु, अब चलो गाड़ की ओर कुछ रन बना कर आते है , क्रिकेट सबसे प्यारा गेम है हमारा और जबसे धोनी भारतीय टीम का कप्तान बना है तब से मजा दुगना हो गया है , चाहे रह वो झारखण्ड मैं रहा हो , परन्तु है तो पूरा पहाड़ी वो , अपने अलोमोड़े का है , कभी पिताजी का इंटरव्यू देखा धोनी का पक्का  पान दा लगते है ! इसलिए बहुत सारे धोनी इस गाँव मैं भी रहते है ..चलो हो जाए फिर एक गेम क्रिकेट का !

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