चुनाव के कुम्भ मैं कैद है देश मेरा आजकल,वादों के दल दल मैं फंसा है देश मेरा आजकल,
कोई ५६ इंच का सीना देखकर डराता है , कोई दी हुई कुर्सी छोड़कर भाग जाता है ,
पांच साल तक गद्दी तोड़ने के बाद कोई चुनाव नहीं लड़ना चाहता,
किसको छोड़े , किसको अपनाये इस कश-मकश डूबा है आदमी मेरे देश का आजकल !
कोई भ्रस्टाचार भगा रहा है , कोई महगाई को जुतिया रहा है , कोई अच्छे दिन ला रहा है .
ठगा जा रहा है आदमी फिर से मेरे देश का आजकल !
महंगाई , भ्रस्ताचार और राजनीतिक दुर्व्यवहार ,
इन सबको मेरा दुश्मन क्यों बना देते है नेता मेरे देश के
अरे यही तो मेरे असली साथी है , जो सदा मेरे साथ जिए मरे,
यही तो आखिर दोस्त है मेरे ,फिर इनसे क्या बैर ,
यही मेरे अपने है हम में नहीं कोई गैर...!
नेता आये नेता गए, वादे आये वादे गए ,
मेरा देश वैसे ही था , वैसे ही रहेगा
मेरे तो पता नहीं कुछ के जरुर अच्छे दिन आये है ,
बस इसी ख़ुशी मैं जी लेता हु ,
दर्द अपने सी लेता हु ....!
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