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सावन की पहली बारिश..!

                                                                 
मौसम काफी खुशनुमा है , सूरज पुरे दिन नदारद रहता है , सूरज से इस मौसम मैं प्यार करना खतरनाक हो सकता है इसलिए उसे बादल के पीछे   छुपा हुआ देखकर मन और तन दोनों को शांति मिलती है , गर्मी अब चिपचिपी हो चली है , यह वह मौसम है जिसमे न पंखा और न कूलर अपनी ड्यूटी ठीक से कर पाते  है उनका चलना सिर्फ एक आवाज करता है उनका श्रम सकून नहीं दे पाता है ! सुना है ऐसी ही इस परेशानी का हल है पर बिजली के बढ़ते दाम इसके सकून को जहन्नुम मैं बदल देते है  इस लिए इसका प्रयोग प्रतिबंधित है हमारे जैसे परिवारों के लिए !

मैं इस मौसम मैं सकून के लिए  सबसे ज्यादा बारिश की बूंदों पर निर्भर रहता हु , पहाड़ से अभी आया हु, पहाड़ की  ठण्ड  और दिल्ली की  गर्मी ने शरीर पर अपनी छाप छोड़ी है  ,  शरीर उबल सा गया है , एक तो शरीर पहाड़ की धुप से थोडा सावला हो गया है और अब ऊपर से दिल्ली की गर्मी ने पुरे बदन को घमोरियो से घेर लिया है , नायसिल का विज्ञापन देख कर मन मैं ठण्ड से लगी , पर इस्तेमाल करने के बाद वैसा मजा नहीं आया और न ही घमोरियो ने शरीर छोड़ा, रोज रोज बढती घमोरिया परेशानी का कारण भी बन रही है , कभी कभी भयानक खुजली परेशान करती है , अब सिर्फ सावन की पहली बारिश का इन्तजार है उसमे नहाकर इन घमोरियो से सदा के लिए छुट्टी मिल सकती है !

आज सुबह से ही सूरज बदलो से जीत नहीं पाया है , बादल ने उसे अपने आगोश मैं छुपा कर रखा है , आज पुरे आसमान मैं  बादलो का राज लगता है , बड़ी राहत सी मह्शूश हो रही है , अब अब इन्तजार है  बारिश की पहली बूंद का , बार - बार असमान की ओर देखता हु , और लगता हैं इंद्र देवता के पास बड़े दिनों के बाद मेरी अर्जी पहुची है उन्होंने  बूंदों को जमीन पर भेज दिया है , मैं भी कपडे उतर कर छत पर पहुच गया हु, बदन मैं लगती इन बूंदों से एक अजीब सा सुख मिल रहा है , बड़े जोर शोर से इनका मजा लिया जा रहा है , मन मैं एक बड़ी ख़ुशी यह भी है की , अब इन    बेहया घमोरियो का दर्द नहीं सहना पड़ेगा , अब कुछ ही दिनों मैं ये मेरे शरीर से बहार चली जाएँगी , इसी सोच मैं मग्न मैं इस घनघोर होती वर्षा का मजा लेता हु , डूब गया हु पहली बारिश के आगोश मैं तन ही नहीं पूरा बदन और मन बारिश ने नहला दिया है , काफी हल्का लग रहा है बदन और दिमाग....सचुमुच ..पहली बारिश का मजा कुछ और ही है ..!

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