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गैरसैण ..देहरादून.....कहानी दो औरतो की ..!


गैरसैण  का महत्व सबके लिए अलग - अलग है , इसका महत्त्व समय - समय पर बदलता भी रहता है ! राज्य  बन ने से पहले , राज्य बन ने के बाद, सरकार बन ने से पहले , सरकार बन ने के बाद, चुनाव जीनते से पहले और चुनाव जीतने के बाद ! जैसे जीवन की रेखाए बदलती है आम आदमी के हाथ मैं वैसे ही गैरसैण की तकदीर बदलती है ! मुद्दे को कब उठाना है , कब बिठाना है यह हमारे नेताओ से अच्छा कौन जान सकता है !किसी नेता को आज गैरसैण अच्छा लगता है , क्योकि उसे अचानक लोगो की भावनाओ का ख्याल आ गया है , और आज अचानक उन भावनाओ की कद्र करनी है तो उनका बयान आ जाता है , और गैरसैण के बारे मैं जब भी कोई बयान आता है , वो अपने आप ऐतिहासिक हो जाता है , वैसे भी रोज रोज गैरसैण की कोई बात नहीं करता है !

मैं गैरसैण को राजनीती के मुद्दे से दूर एक दूसरी नजर से देखता हु , मेरा नजरिया हो सकता है काफी अटपटा लगे गा  कुछ लोगो को , लेकिन यह अक्सर हम आम जीवन मैं महसूस करते है ! देहरादून एक ऐसा आधुनिक शहर है जिसमे पूंजीपति लोग रहते है , शिक्षा का सबसे बड़ा हब है , यहाँ के विद्यार्थी सीधा पढ़ कर विदेशो मैं नौकरी पाते है , सौन्दर्य है , चमक - धमक है , लोगो के ठाट- बाट है , अपने आम मैं एक hep शहर है , इसमें मुझे वो सब दीखता है जो एक आधुनिक नारी मैं है , faishon है स्टाइल है , एक अनूठा अंदाज है ! सबकी पसंद है , लोग अक्सर घुमने के लिए इस शहर का रुख करते है , और राजधानी बन ने के बाद इसकी सुन्दरता मैं और चार चाँद लग गए , इलीट पोलिटिकल क्लास , बिल्डर्स  सबने इसकी सुन्दरता को चार चाँद लगा दिए , और यह शहर उत्तराखंड के पॉवर -फुल कम्युनिटी का हब है , यह एक अंग्रेजी में की तरह शहर है !

अब चले गैरसैण की ओर , जो अभी विकास की नजरो से काफी पीछे है , पहाड़ है , खेत है , लेकिन न कोई बाजार है न कोई चमक धमक है , यहाँ पहुचने के लिए सिर्फ सड़क के जरिये जाया जा सकता है , न कोई रेल मार्ग न कोई हवाई अड्डा , गड्ढे , संकरी सड़क कैसे राजधानी का बोझ उठा सकती है ! विधान सभा सदस्यhi कैसे सड़क के रास्ते यहाँ पहुचेंगे ! यह शहर एक पहाड़ की बौडी अम्मा की तरह है !

जब अंग्रेजी मेम और बौडी अम्मा मैं से चुनाव करना हो तो ..लोग सदा मेम की ओर ज्यादा आकर्षित होते है , और ऐसा  स्वाभाविक भी है  मैं २ - ४ दिन  बौडी अम्मा के पास जा कर भावना का सम्मान तो कर सकते हु  पर वह रह नहीं सकता  , शायद यही कारण है हमारे नेता लोग इस मेम के साथ रहना चाहते है पर ...बौडी को नहीं भूलना चाहते  क्योकि भावनाए भी कोई चीज होती है वो चाहे कुछ करे न करे ..वोट तो मांग ही सकते है इस दम पर !

अगर मन मैं इच्छा शक्ति हो तो कुछ भी हो सकता है ,  उत्तराखंड हमें दूसरो से ले लिया , लेकिन अपनों से हम गैरसैण नहीं ले पा रहे है ,उत्तराखंड राज्य इस लिए माँगा था की पुरे उत्तराखंड का समुचित विकास हो सके , न की इसलिए जो आलरेडी विकसित है उसके और विकास के लिए ...अब ये जनता सोचे वह क्या चाहती है ....आखिर लोकतंत्र मैं जनता ही सर्वोपरि है ..!

यह मेरे अपने विचार है ..कृपया इस लेख को अन्यथा न ले ...मैं भी एक उत्तराखंडी हु जो सब के सम्मान मैं विश्वास करता हु...राजनीती से परे होकर इसका आनंद ले...!

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