सफ़र मैं कही दूर चले जाने को दिल करता है ,
जिंदगी को कुछ अलग तरह से निभाने को दिल करता है ,
हम तो सोच के आये थे सब अपने है ,
पर अपनों से भी पराया बन जाने को दिल चाहता है ,
ए जिन्दगी तेरे बहुत एहसान है मुझ पर ,
इन एहसानो के तले डूब जाने को दिल चाहता है ,
यो सदा उम्मीद अपनों से रही ,
परायों को कभी नजदीक आने न दिया ,
पर इस तूफा से भरी जिंदगी मैं कुछ ऐसे तूफा आये ,
की अपने भी परायो से परे निकल गए ,
और हमें एक सीख दे कर चले गए ,
कि जिंदगी के तूफा सब तहस नहस कर देते है ,
ऐ इंसान तेरी ईमान कोई पत्थर की लकीर तो नहीं ..!
सुन्दर अभिव्यक्ति
जवाब देंहटाएंधन्यवाद ..राजेंदर भाई ...आपकी उत्साहवर्धक गोलियों की सदा जरुरुँत रहेगी ...!
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