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पलायन का दुख ..पहाड़ का सुख ...आप चुने...!

पलायन  का दर्द जाने - अनजाने मैं हम सबने सहा है , पर पलायन ही हर बीमारी का हल है , ऐसा लगता नहीं , आज पलायन ही एक ऐसी प्रक्रिया है जो दिन प्रतिदिन जोर पकडती जा रही है , और पलायन के नशे मैं हम इतने मस्त हो गए है की लगता है पलायन नामक संजीवनी बूटी  हमारे सब कष्टों का निवारण कर देगी , पर क्या यही एक दवा है जो हमारे जीवन को खुशियों से भरने मैं कामयाब है ? यही कुछ प्रश्न आज मन मैं कौंध रहे है सोचा इस पर ही कुछ लिख दिया जाय !

 पहले समय मैं  पलायन एक मज़बूरी थी लेकिन अब यह एक मानसिकता बन गयी है, मज़बूरी से खतरनाकहै मानसिकता का बदलना और किसी चीज को सच मानना ! इसके उधारण आपको कई मिलते है आज के समाज मैं , जैसे की गाँव मैं काम करने वाले लड़के से कोई लड़की शादी नहीं करना चाहती ,खेती को कोई अपना भविष्य नहीं मानता , माँ - बाप अपने बच्चो का रिश्ता सिर्फ उस लड़के से करना चाहते है जिसका दिल्ली शहर मैं मकान हो , और जो दुल्हन की डोली घर मैं उतारते ही अगली केमू गाड़ी से दिल्ली पहुच जाए , गाँव मैं कोई भी एक पल नहीं रहना चाहता ! नेता देहरादून पहुच गए है , मास्टर भी देहरादून , हल्द्वानी, रामनगर और कोटद्वार पहुच गए है , फिर कैसे होगा पहाड़ का विकास , और वैसे भी विकास की जरुरत क्या है , काफी है ३ दिन का टेंट गैरसैण मैं , इस से ज्यादा न हमें जरुरत है और न नेता हमें दे सकते है , आखिर भावना को वो तीन दिन का टेन्टईय अधिवेशन करके सीच तो रहे है , कम से का चुनाव मैं तो वो कह ही सकते है की हम गैरसैण गए थे.!

इस मानसिकता के लोग , रिश्ता तय करने से पहले , घर ,परिवार लड़के की क़ाबलियत नहीं देखते , उनको सिर्फ लड़के के बाप का मकान जो दिख रहा है , जिसके अन्दर सब क़ाबलियत भरी हुई है , मेरे  संज्ञान मैं ऐसे घर है जो इस कारण टूटे है ,क्योकि उन्होंने लड़के की और कभी ध्यान नहीं दिया , और शादी के बाद  लड़का निकला निपट बिगड़ा , शराबी ,कबाबी फिर बात आगे बड़ी , पुलिस तक पहुची  अदालत तक पहुची , और इस प्रकार से एक घर बर्बाद हो गया ! ऐसे बहुत सारे घर आपको मिल जायेंगे ! इस मानसिकता को बढ़ावा देने वाले लोग , और इसमें विश्वास करने वाले लोगो को अक्सर मुह की खानी पढ़ती है ! माँ- बाप का दिल्ली प्यार .. एक मित्र के साथ तो हद हो गयी , वो भाई साहब बड़े इमानदार, शरीफ थे, गाँव मैं छोटी -मोटी नौकरी करके घर चलाते थे , शादी की उम्र आ गयी माँ बाप लड़की देखने लगे , काफी लड़की देखने के बाद शादी नहीं हो पायी , क्योकि सबकी यही डिमांड लड़का दिल्ली मैं नौकरी वाला होना चाहिए ..फिर क्या था इन महाशय को किसी ने समझाया और दिल्ली मैं नौकरी लगा दी, नौकरी लगते ही तीसरे महीने शादी पक्की और ६ महीने मैं शादी , और शादी होते ही भाई साहब ने झोला-चिमटा पकड़ा और गाँव निकल लिए , अब लड़की और लड़की के श्शुराल वाले कुछ नहीं कह सकते थे ..जो होना था वो हो गया , लेकिन यह मित्र समझदार थे , इन्होने अपनी मेहनत से अच्छा कारोबार खड़ा कर दिया और काफी खुश जिंदगी व्यतीत कर रहे है !

आज पहाड़ मैं भी बहुत प्रकार के व्यवसाय है जिनको कर के जिंदगी काफी अच्छी तरीके से जी जा सकती है , सरकारी नौकरी , और बिज़नस करने के बहुत साधन उपलब्ध है , जिनकी सहायता लेकर आप गाँव मैं अच्छी कमाई कर सकते है , अब समय आ रहा है रिवर्स ब्रेन - ड्रेन का , बहुत बुद्धिजीवी लोग शहर छोड़ कर गाँव का रुख कर रहे है , क्योकि पैसे के अलावा शांति , और प्रकिरितिक धन सिर्फ यही उपलब्ध है जिसकी कीमत रुपये- पैसे मैं आंकना संभव नहीं है ...इसलिए दोस्तों , गाँव का रुख कर के आप ख़ुशी के करीब पहुच सकते है ...!



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