पहाड़ का विशाल जीवन जो अक्सर आज के भौतिक युग मैं काफी सामान्य माना जाता है , वास्तव मैं काफी विशाल है ! यहाँ पर रहने वाली माँ, दादी, दादा सचमुच दुनिया के सबसे प्यारे और महत्वपूर्ण लोग है अपनी जिंदगी के , ये वो लोग है चाहे पूरी दुनिया आप को भूल जाये , आपके साथ न खडी हो, पर ये गाँव के उस पहाड़ की तरह सदा आपके लिए खड़े रहेंगे !
आज मैं इन्ही रिश्तो की बात करना चाहता हु, ये ऐसे रिश्ते है जिसे एक आधुनिक और आगे देखने वाला हम जैसे लोग, आम समय मैं उतनी तवज्जो नहीं देते , उसी का जिक्र आज मैं कर रहा हु इस लेख मैं, माँ सदा से गाँव मैं रही क्योकि खेत बंजर किसी भी पहाड़ की औरत को पसंद नहीं है , जीते जी वो कभी नहीं चाहती की उसके खेत बंजर हो चाहे उसमे अनाज का एक दाना न हो पर खेत का अपना एक श्रृंगार है, जिसे पहाड़ की नारी अपने श्रृंगार से भी ज्यादा महत्त्व देती है , इसलिए खेत सदा हरा भर रहना चाहिए.! पिता दिल्ली मैं सरकारी नौकरी करते थे इसलिए दोनों बेटो को दिल्ली मैं पढाया , परन्तु पढाई भाग्य मैं नहीं थी , इसलिए कुछ खास पढ़ लिख नहीं पाए, सिर्फ कम चलाऊ पढाई से एक साधारण सी नौकरी मिली जिसमे अपना गुजरा भी मुश्किल से चलता था, पिता रिटायर हो गए , और जैसा अक्सर हम लोग करते है , सब पैसा गाँव के लेंटर के मकान मैं लगा दिया, बेटो को किराये के कमरे दिलवा कर पिता चले पहाड़ मैं जीवन बिताने ! दोनों भाई अपने हिसाब से नौकरिया करने लगे , समय बीता शादी की बात शुरू हुई , बड़े भाई को घरवालो ने खूब प्रेशर डाला और शादी करवा दी ! पहाड़ की शादी मैं घर वाले इसलिए शादी करते है की बहु आएगी और खेती मैं हाथ बताएगी , परन्तु बहु ने अगर दिल्ली वाले से शादी की तो उसका मन फिर कहा खेतो मैं लगता है..!
अब पहाड़ मैं भी टीवी चला गया है , एकता कपूर के सीरियलो ने अशिक्षित बहु को भी शिक्षित कर दिया है इसलिए उसे वो सब तौर - तरीके आते है , जिनसे अपनी बात मनवाई जा सकती है , क्रीम , पाउडर, लिपस्टिक और मोबाइल ये सब चीजे आजकल पहाड़ के नारी के साथ आपको सदा मिल जाएँगी , और अगर उसकी शादी अभी हुई है तो फिर पका, यही हुआ, अब मोबाइल दिन, रात, शाम सवेरे , घर की बाते दिल्ली पहुचती है , और दिल्ली की घर , फिर धीरे - धीरे हर एक छोटे काम मैं भी दिल्ली से सुझाव आने लगे ! फ़ोन सदा ही बहु के पास होता , और दिल्ली से रिचार्ज का ही बिल हजार से डेढ़ हजार तक पहुच रहा था , बाते बड़ी महंगी भी पद रही थी ! इसी दौरान एक दिन सुबह खेत जाना था बहु को परन्तु उसके सिर मैं जोर से दर्द होने लगा और उसने यह बात पतिदेव से कही और कहा की आज वो खेत पर कम करने नहीं जा सकती है , इसलिए आप मम्मी को फ़ोन करके कह दो , मरता क्या न करता , उसने मम्मी जी को फ़ोन लगाया , और कहा " मम्मी आज तुम्हारी बहु खेत नहीं जा सकती, " मम्मी ने पूछा , " क्यों " बेटा बोला " उसके सिर मैं दर्द हो रहा है " मम्मी जी को अपने लड़के पर जोर से गुस्सा आया और उन्होंने लड़के को कहा, " बहु मेरे बगल के कमरे मैं बैठी है , अगर उसके सिर मैं दर्द है तो वह मुझसे कह सकती है , इसके लिए उसे , तुझे फ़ोन करने की क्या जरुरत थी, और तू उसको समझाने की बजाय मुझे फ़ोन कर रहा है, वैसे आज तक तूने हमारी खोज खबर कभी नहीं ली , की कितना दर्द और दुःख हम ने सहा है जीवन मैं , उसके एक सर दर्द ने तुझे दुखी कर दिया , वाह बेटा वाह, हमारा दर्द तुझे कभी नहीं दिखा उसके दर्द ने तुझे दुखी कर दिया , ..चल कोई बात नहीं , उसे समझा दे की कभी ऐसी बात होती है तो दिल्ली फ़ोन करने की जरुरत नहीं है सीधा हमें बोल दे, हम एक ही घर मैं रहते है और अगर तबियत ठीक नहीं है तो काम करने की जरुरत नहीं है , मैं भी माँ हु , और मैंने भी दर्द देखे है " माँ ने यह कह कर फ़ोन काट दिया !
ऐसा ही कुछ घट ता है आपके और मेरे जीवन मैं अक्सर , हमें अपने जो रिश्ते प्यारे होते है उनके लिए हम सब कुछ कर सकते है , सात समुन्दर पार से भी हम रोज बात कर सकते है , हाल चल पूछ सकते है , पर हे मनुष्य, हे इक्कसवी सदी के आधुनिक इंसान , कभी उनके बारे मैं भी सोचा है तूने, जिस माँ और बाप ने इतने कष्ट सहे और इतना बड़ा किया तुम्हे....कभी उन्हें भी फ़ोन कर लिए करो , कभी उनके भी हाल जान लिया करो , कुछ दे नहीं सकते तो क्या ...एक फ़ोन करके उनकी आवाज ही सुन लिया करो , उनका आशीर्वाद ही ले लिया करो...याद रहे ..माँ - बाप न आपके पैसे के प्यासे है और न दौलत के , उन्हें तो सिर्फ एक लम्हा प्यार का चाहिए ..जो आप का एक हेल्लो दे सकता है ...इसलिए मित्रो ...always keep in touch with your parents and loved ones...if you really want to live a peaceful life. thanks.
आज मैं इन्ही रिश्तो की बात करना चाहता हु, ये ऐसे रिश्ते है जिसे एक आधुनिक और आगे देखने वाला हम जैसे लोग, आम समय मैं उतनी तवज्जो नहीं देते , उसी का जिक्र आज मैं कर रहा हु इस लेख मैं, माँ सदा से गाँव मैं रही क्योकि खेत बंजर किसी भी पहाड़ की औरत को पसंद नहीं है , जीते जी वो कभी नहीं चाहती की उसके खेत बंजर हो चाहे उसमे अनाज का एक दाना न हो पर खेत का अपना एक श्रृंगार है, जिसे पहाड़ की नारी अपने श्रृंगार से भी ज्यादा महत्त्व देती है , इसलिए खेत सदा हरा भर रहना चाहिए.! पिता दिल्ली मैं सरकारी नौकरी करते थे इसलिए दोनों बेटो को दिल्ली मैं पढाया , परन्तु पढाई भाग्य मैं नहीं थी , इसलिए कुछ खास पढ़ लिख नहीं पाए, सिर्फ कम चलाऊ पढाई से एक साधारण सी नौकरी मिली जिसमे अपना गुजरा भी मुश्किल से चलता था, पिता रिटायर हो गए , और जैसा अक्सर हम लोग करते है , सब पैसा गाँव के लेंटर के मकान मैं लगा दिया, बेटो को किराये के कमरे दिलवा कर पिता चले पहाड़ मैं जीवन बिताने ! दोनों भाई अपने हिसाब से नौकरिया करने लगे , समय बीता शादी की बात शुरू हुई , बड़े भाई को घरवालो ने खूब प्रेशर डाला और शादी करवा दी ! पहाड़ की शादी मैं घर वाले इसलिए शादी करते है की बहु आएगी और खेती मैं हाथ बताएगी , परन्तु बहु ने अगर दिल्ली वाले से शादी की तो उसका मन फिर कहा खेतो मैं लगता है..!
अब पहाड़ मैं भी टीवी चला गया है , एकता कपूर के सीरियलो ने अशिक्षित बहु को भी शिक्षित कर दिया है इसलिए उसे वो सब तौर - तरीके आते है , जिनसे अपनी बात मनवाई जा सकती है , क्रीम , पाउडर, लिपस्टिक और मोबाइल ये सब चीजे आजकल पहाड़ के नारी के साथ आपको सदा मिल जाएँगी , और अगर उसकी शादी अभी हुई है तो फिर पका, यही हुआ, अब मोबाइल दिन, रात, शाम सवेरे , घर की बाते दिल्ली पहुचती है , और दिल्ली की घर , फिर धीरे - धीरे हर एक छोटे काम मैं भी दिल्ली से सुझाव आने लगे ! फ़ोन सदा ही बहु के पास होता , और दिल्ली से रिचार्ज का ही बिल हजार से डेढ़ हजार तक पहुच रहा था , बाते बड़ी महंगी भी पद रही थी ! इसी दौरान एक दिन सुबह खेत जाना था बहु को परन्तु उसके सिर मैं जोर से दर्द होने लगा और उसने यह बात पतिदेव से कही और कहा की आज वो खेत पर कम करने नहीं जा सकती है , इसलिए आप मम्मी को फ़ोन करके कह दो , मरता क्या न करता , उसने मम्मी जी को फ़ोन लगाया , और कहा " मम्मी आज तुम्हारी बहु खेत नहीं जा सकती, " मम्मी ने पूछा , " क्यों " बेटा बोला " उसके सिर मैं दर्द हो रहा है " मम्मी जी को अपने लड़के पर जोर से गुस्सा आया और उन्होंने लड़के को कहा, " बहु मेरे बगल के कमरे मैं बैठी है , अगर उसके सिर मैं दर्द है तो वह मुझसे कह सकती है , इसके लिए उसे , तुझे फ़ोन करने की क्या जरुरत थी, और तू उसको समझाने की बजाय मुझे फ़ोन कर रहा है, वैसे आज तक तूने हमारी खोज खबर कभी नहीं ली , की कितना दर्द और दुःख हम ने सहा है जीवन मैं , उसके एक सर दर्द ने तुझे दुखी कर दिया , वाह बेटा वाह, हमारा दर्द तुझे कभी नहीं दिखा उसके दर्द ने तुझे दुखी कर दिया , ..चल कोई बात नहीं , उसे समझा दे की कभी ऐसी बात होती है तो दिल्ली फ़ोन करने की जरुरत नहीं है सीधा हमें बोल दे, हम एक ही घर मैं रहते है और अगर तबियत ठीक नहीं है तो काम करने की जरुरत नहीं है , मैं भी माँ हु , और मैंने भी दर्द देखे है " माँ ने यह कह कर फ़ोन काट दिया !
ऐसा ही कुछ घट ता है आपके और मेरे जीवन मैं अक्सर , हमें अपने जो रिश्ते प्यारे होते है उनके लिए हम सब कुछ कर सकते है , सात समुन्दर पार से भी हम रोज बात कर सकते है , हाल चल पूछ सकते है , पर हे मनुष्य, हे इक्कसवी सदी के आधुनिक इंसान , कभी उनके बारे मैं भी सोचा है तूने, जिस माँ और बाप ने इतने कष्ट सहे और इतना बड़ा किया तुम्हे....कभी उन्हें भी फ़ोन कर लिए करो , कभी उनके भी हाल जान लिया करो , कुछ दे नहीं सकते तो क्या ...एक फ़ोन करके उनकी आवाज ही सुन लिया करो , उनका आशीर्वाद ही ले लिया करो...याद रहे ..माँ - बाप न आपके पैसे के प्यासे है और न दौलत के , उन्हें तो सिर्फ एक लम्हा प्यार का चाहिए ..जो आप का एक हेल्लो दे सकता है ...इसलिए मित्रो ...always keep in touch with your parents and loved ones...if you really want to live a peaceful life. thanks.
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