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जीवन का मकसद?. आखिर है क्या???


 मन मैं एक समय मैं हजारो सवालो की आवाजाही होती है कुछ के जवाब मिल जाते है , कुछ के खोजे नहीं जाते है , और कुछ बिना कहे से शांत हो जाते है! हर पल एक नया सवाल लेकर पैदा होता है अगर आप अहमियत दो तो , लेकिन कुछ सवाल इतने अहम् हो जाते है की बार बार जनम लेने के बाद भी उनका जब उत्तर नहीं मिलता आप उन्हें अपने पास रख लेते हो , आप को उनसे प्यार हो जाता है , पर जवाब नहीं मिल पाता है , क्योकि हर सवाल का जवाब मीठा नहीं हो सकता और हर सवाल का जवाब भी नहीं होता !
आज अपनी इस उधेड़बुन को कुछ आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा हु , सोच रहा हु उस सवाल के बारे मैं जो सदा जहाँ मैं आता है , इधर उधर मन की दिवार पर टक्कर मारता है , पर आज तक उसको उसका जवाब नहीं मिल पाया है , सवाल है. " क्या मकसद है इस जिंदगी का? "
शब्द इस सवाल मैं सिर्फ छह है पर मुझे लगता है पूरी जिंदगी चली जाएगी इसका सही जवाब पाने मैं, जनम लिया, जीवन चक्र पूरा किया और चले गए , वैसे तो जिंदगी इसी सफ़र को कहते है , पर क्या यही मायने रखती है जिंदगी हम सब के लिए ! इस संसार मैं कितने देश है , कितने धर्म है सबने अपने हिसाब से इस मकसद को समझाने की कोशिश की है , सबका अपना अलग अलग मत है , जब इतने बड़े धरम गुरु इस सवाल का जवाब नहीं दे पाए तो मैं एक आम बुद्धि रखने वाला प्राणी कैसे इस बात का जवाब दे सकता हु , गीता कहती है " खाली हाथ आया है और खाली हाथ जायेगा" अगर यह मकसद है जिंदगी का तो हम अपना पूरा जीवन अपना घर भरने मैं लगा देते है , फिर भी दुखी रहते है , क्योकि भरा हुआ कही खाली न हो जाये इसका डर सताता रहता है ! और उस घर भरने की होड़ मैं हमें अगर कोई बुरा काम भी करना पड़ता है हम उसे भले मन से कर देते है , उसके करने मैं कोई गुरेज नहीं रखते , और उसे कर्म का नाम देकर उस का नामकरण कर देते है ! आज जो लोग धर्म के नाम पर रोटी खा रहे है , जो दुनिया को इस बात का महत्त्व समझाने मैं सबसे आगे है वो ही इस उपदेश का तिरस्कार कर रहे है अपने जीवन मैं क्योकि वो ही सबसे पहले अपना घर भरने पर लगे हुए है !
भूख ने इंसान को एक प्रकार का दानव बना दिया है , उसे अपने अलावा किसी और का ख्याल नहीं रहता और वह सब कुछ अपने वश मैं करना चाहता है ,इस कोशिश को बहुतो बड़े बड़े लोगो ने कर के भी दिखाया है , परन्तु वह सब उनका कभी नहीं रहा , क्योकि कुछ समय बाद उनसे भी बड़ा आकर उनकी पूंजी को अपने  कब्जे मैं  कर लेता है वह एक समय का राजा बड़ी आम सी मौत मरता ! तो क्या यह एक मकसद है जिंदगी का ? शायद कुछ लोगो के लिए ये सच हो पर सब इस पर अमल नहीं करते ! आज हर इंसान की परिभाषा अलग - अलग है इस प्रश्न की , और यह समय समय और बदलते अनुभव के साथ बदलती भी रहती है , इसलिए इस प्रश्न का उचित जवाब देना संभव नहीं होगा , हो सकता है जो उद्देश्य मुझे आज नजर आ रहा है जिंदगी का , कल वो बिलकुल ही बदल जाए , इसलिए इस सवाल को यही छोड़ देते है ! मित्रो अगर आप मेरी सहायता करना चाहते है तो आपका स्वागत है , हो सकता है आपके पास ही इसका कोई सही जवाब हो ...तब तक के लिए --अलविदा...!

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