" पथरीला रास्ता " अपराधो से लडती नारी की कहानी !
महिला के बारे मैं सोचने पर मजबूर कर देती है , दिन प्रतिदिन बढ़ने वाली ये अपराधिक घटनाये ! आज हम महिला को एक समाज मैं माँ , बहन, बेटी के रूप मैं देखते है , इसे देवी की तरह मंदिरों मै और कंजको मैं पूजते है ...और इसी समाज का दूसरा छोर इसे निर्भया, दामिनी , किरण बनाकर इसकी जिंदगी नरक बना देता है , इसी समाज का एक हिस्सा बदायु भी है ! न जाने कितने जीवन कानून तक पहुचने से पहले ही रुखसत कर देते है , आखिर नारी को कब तक इन दोनों असामान्य समाजो का सामना करना पड़ेगा ?
यहाँ कानून भी है , पुलिस भी है न्यालय भी है ,पर अपराध फिर भी बढ़ रहे है , निर्भया के चीख ने पुरे समाज को क्रोधित कर के रख दिया , माँ, बहने, बेटिया यहाँ तक की पूरा समाज सड़क पर आया इस के विरुद्ध , पर क्या हुआ आज अभी भी कितनी निर्भयाये रोज प्रताड़ित की जाती है , उनके साथ बलात्कार होता है , उनपर एसिड फैका जाता है , शक्तिशाली मीडिया होने के बावजूद इन अपराधो मैं रत्ती भर कमी नहीं आई है ! कानून बदलने की बात हुए , फांसी की सजा की बात हुई , यहाँ तक की नपुंसक बनाने की भी बात हुई , परन्तु फिर भी अपराध मैं कमी नहीं आई, बल्कि और अपराध बढ़ते चले जा रहे है ! अभी तक यह गुस्सा सिर्फ उन अपराधो पर निकला है जो समाज मैं किसी अनजाने के साथ क्रूर तरीके से होते है पर उन अपराधो का क्या जो घर मैं दरवाजो की पीछे होते है जिनमे कोई घर का बड़ा लिप्त होता है ? एक जीवन जो जिंदगी भर इस अपराध को मन मैं छिपाए जीता है ?
अपराध की इन विभिन्न परतो पर कला मंच के द्वारा प्रदर्शित " पथरीला रास्ता" का मंचन हमने २२ जून २०१४ को सफ्दरजंग AAOI क्लब मैं देखता ! अपनी कला के माध्यम से कलाकारों ने समाज के इस रूप को सबके सामने रखा , कैसे अपराध होता है और कैसे समाज अपने तथ्यों से इस अपराध को रोकने की कोशिश करता है ! Dr सुवर्ण रावत द्वारा निर्देशित यह नाटिका दर्शको पूरी तरह से मन्त्र मुग्ध कर गयी और दर्शको ने भी अपना गुस्सा अपनी बातो के जरिये रखा ! यह नाटिका ने हमें फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया है , की जो भी कदम हम उठा रहे है , वह सब पर्याप्त नहीं है , इस अपराध से लड़ने के लिए हमें अभी बहुत कुछ करना है !
इस अपराध को अगर जड़ से मिटाना है तो इस में कानून, पुलिस , न्यालय की भूमिका से बढ़कर समाज को अपनी भूमिका निभानी पड़ेगी ! कानून , पुलिस और न्यालय पर बात अपराध होने के बाद जाती है , उस से पहले समाज को जागना होगा अपना दायित्व निभाना होगा , तभी यह अपराध जड़ से ख़त्म होगा अन्यथा निर्भया और दामिनी हमें सदा अपने कर्तव्य को निभाने के लिए सवाल उठाती रहेंगी , आखिर क्या दोष था इन सबका जो समाज ने इन्हें यह सिला दिया ? नारी को हम देवी का दर्जा न देकर सिर्फ एक सामान नागरिक का अधिकार भी दे दे तो वह नारी के लिए काफी होगा...! नारी के अपराधो के विरुद्ध यह लडाई तब तक चलती रहेगी जब तक समाज मैं नारी के अधिकार बराबर के नहीं होते , समाज मैं प्रधानता खतम करनी पड़ेगी , पुरुष और स्त्री दोनों के बराबर के अधिकार होने चाहिए , यही हमारी कामना है !

बहुत सुन्दर प्रयास आपकी समस्त मंडली को कोटि कोटि धन्यवाद
जवाब देंहटाएंआपके सहयोग के बिना यह सब संभव नहीं था ..आपके सहयोग की सदा लालसा रहेगी ..!
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