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माँ - बाप के आगे कोई नहीं ...!


             माँ-बाप के आगे कोई नहीं। 


पहाड़ की याद दिल से जाती नहीं है ,
वो माँ के आसू , पिता का आशीर्वाद , 
इनकी याद सदा दिल के पास रहती है ,
क्या है जिंदगी अपनों  के बिना ,
पर फिर क्यों जिंदगी  बितानी पड़ती है ,
वो सुबह का भात और रात की रोटी,
कितनी प्यारी लगते है फिर भी दूर है इनसे,
बहुत कुछ करना है जिंदगी मैं , 
खूब आगे बढ़ना है , पैसा कमाना है ऐशो आराम लाना है। 
पर क्यों नहीं है  माँ-बाप इस  आगे बढ़ने मैं साथ 

कभी कभी सोचता हु जिंदगी जिसने चलना, पढना आगे बढ़ना सिखाया.
उन्हें ही आज मैं छोड़ चला हु इस पहाड़ के सहारे.
वो  मेरे दर्द मैं मरहम लगाने के लिए खड़े थे ,
लेकिन मैं कब उनके आसू पोछ पाउँगा.. 
जिंदगी मैं चला तो था आगे बढ़ने ,
लेकिन मुझे लगता है , मैं बहुत पीछे रह गया ,
क्योकि माँ - बाप के आगे कोई भी नहीं। ।!                     

टिप्पणियाँ

  1. सीधे दिल से कागज़ पर उतरी कविता !,,, बहुत सुन्दर भाव!

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  2. अद्भुत पंक्तियाँ...मन को छूते शब्‍दों का संगम ... आभार इस प्रस्‍तुति के लिए

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  3. shalini ji ...शुक्रिया ..सहस बढ़ाने के लिए !

    जवाब देंहटाएं
  4. संजय भास्कर , जी जो मन मैं आया सीधा कागज के हवाले कर दिया , आपको पसंद आया आभार !

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