रिश्तो की गहराई को चेक करते रहना चाहिए , पता चले आप खुद ही खयाली पुलाव बना रहे हो , और दूसरी तरफ़ से ऐसा कभी नहीं था , अभी का वाकया है , सिर मैं काफी सालो के बाद दर्द हो रहा है , सोचा थोडा इसे इज्जत दी जय यह अपने आप चला जायेगा, पर काफी जिद्दी है गया नहीं इसलिए एक गोली भी खानी पड़ी और छोटी बिटिया ने प्यार से खानदानी दावा आयोडेक्स भी लगा दी , इसी बीच मम्मी को बोला उसने और मैं भी बुलाया , की जरा आयोडेक्स मॉल दो , पर वो ही की " झलक दिख ला जा" देख रही थी , और मेरे और बिटिया के दो तीन बार आवाज लगाने की बाद टस से मास नहीं हुई , और यह कह दिया की ब्रेक के बाद आउंगी , ....ऐसे ही आजकल आधुनिक जीवन के रिश्ते है जो सिर्फ ब्रेक मैं प्यारे लगते है और जैसे ही ब्रेक ख़तम होता है , उनका कोई मतलब नहीं रह जाता ....अभी तो ब्रेक १०-१५ मिनट मैं आजाता है कभी - कभी एक ब्रेक मूवी भी आ रही है अगर उसमे आपको कोई दर्द उठे तो राम ही मालिक है आपका.....जय हो आधुनिक औरत...! —
feelingannoyed.
परिचय: जब प्रकृति ने अपना सब्र खो दिया 5 अगस्त 2025। यह तारीख उत्तराखंड के इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है। इस दिन से पहले, उत्तरकाशी जिले में गंगा (भागीरथी) के किनारे बसा खूबसूरत गाँव 'धराली' अपनी सेब के बागानों, शांत वातावरण और हरियाली के लिए जाना जाता था। यह एक ऐसी जगह थी जहाँ लोग शहर के शोर से दूर सुकून के पल बिताने आते थे। लेकिन उस रात, प्रकृति ने अपना वो रौद्र रूप दिखाया जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। कुछ ही घंटों में, हँसता-खेलता धराली गाँव जलमग्न हो गया, और अपने पीछे छोड़ गया सिर्फ तबाही, खामोशी और अनगिनत सवाल। आज हम उस विनाशलीला को याद करेंगे, उसके कारणों की गहराई में जाएँगे और समझने की कोशिश करेंगे कि धराली की इस जल समाधि से इंसान क्या सबक सीख सकता है। आपदा के पीछे के विस्तृत कारण: यह सिर्फ बादल फटना नहीं था अक्सर ऐसी घटनाओं को केवल "बादल फटने" ( Cloudburst ) का नाम देकर एक प्राकृतिक आपदा मान लिया जाता है। लेकिन धराली की त्रासदी कई वर्षों से की जा रही मानवीय गलतियों और प्रकृति की चेतावनियों को नजरअंदाज करने का एक भयानक परिणाम थी। इसक...
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