रिश्तो की गहराई को चेक करते रहना चाहिए , पता चले आप खुद ही खयाली पुलाव बना रहे हो , और दूसरी तरफ़ से ऐसा कभी नहीं था , अभी का वाकया है , सिर मैं काफी सालो के बाद दर्द हो रहा है , सोचा थोडा इसे इज्जत दी जय यह अपने आप चला जायेगा, पर काफी जिद्दी है गया नहीं इसलिए एक गोली भी खानी पड़ी और छोटी बिटिया ने प्यार से खानदानी दावा आयोडेक्स भी लगा दी , इसी बीच मम्मी को बोला उसने और मैं भी बुलाया , की जरा आयोडेक्स मॉल दो , पर वो ही की " झलक दिख ला जा" देख रही थी , और मेरे और बिटिया के दो तीन बार आवाज लगाने की बाद टस से मास नहीं हुई , और यह कह दिया की ब्रेक के बाद आउंगी , ....ऐसे ही आजकल आधुनिक जीवन के रिश्ते है जो सिर्फ ब्रेक मैं प्यारे लगते है और जैसे ही ब्रेक ख़तम होता है , उनका कोई मतलब नहीं रह जाता ....अभी तो ब्रेक १०-१५ मिनट मैं आजाता है कभी - कभी एक ब्रेक मूवी भी आ रही है अगर उसमे आपको कोई दर्द उठे तो राम ही मालिक है आपका.....जय हो आधुनिक औरत...! —
feelingannoyed.
पहाड़ के बच्चो का जीवन अकसर अपनी माता जी या दादी जी के आँचल मैं पलता और बड़ा होता है , क्योकि पुरुष अधिकतर समय गाव से बाहर रहकर रोटी कमाने की दौड़ मैं लगे होते है ! माना की आज पहाड़ बहुत बदल चुका है परन्तु पहाड़ मैं रहने वाले बच्चो के लिए अभी भी यही सच है ! समय काफी आगे निकल गया है आज मैं जिनके बारे मैं लिखने जा रहा हु वो अब हमारे बीच मैं नहीं है , पर उनकी याद सदा दिल मैं रहती है और उनके मेरे जीवन पर बहुत एहसान है , इतना बड़ा परिवार है तो उसका कारण सिर्फ वो है , उन्होंने एक पक्की नीव की तरह हम सब के जीवन को सहारा दिया है ! आज पिताजी की उम्र ७५ साल की हो गयी है और उनसे लगभग बीस साल पहले आमा जन्म कुमाऊ के द्वाराहट स्थित किरौला गाँव मैं हुआ था , मैंने यह गांव कभी नहीं देखा पर सुना जरुर है इस गाँव के बारे मैं ! लगभग १९२० के समय उनका जन्म इस गाँव मैं हुआ होगा ! उनके बचपन के बारे मैं कभी बात नहीं हुई , पर यह जरुर पता है की लगभग १२ वर्ष की उम्र मैं उनकी शादी मेरे दादा जी के साथ हो गयी थी ! १२ वर्ष आज के ज़मा...
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