आज सुबह मन बड़ा दुखी और रुधने सा हो रहा है .....अमृता रावत( पत्नी सतपाल महाराज और पूर्व मंत्री उत्तराखंड सरकार) जी को रोते हुए देख कर मन मैं अन्दर तक दुःख की पीड़ा पहुच गयी, इस्तीफा माँगा हुआ ...कितना दुःख देता है ...यह अनुमान आप .सचमुच इस जनसेवी के अशुप्रुण चेहरे को देख कर लगा सकते है इसलिए मुझसे बिना कुछ कहे रहा नहीं गया...मैं आपसे इस दुःख को शेयर कर रहा हु....मुझे पूर्ण विश्वास है की उनकी इस दुःख की घडी मैं हम सब उनके साथ है....!
पहाड़ के बच्चो का जीवन अकसर अपनी माता जी या दादी जी के आँचल मैं पलता और बड़ा होता है , क्योकि पुरुष अधिकतर समय गाव से बाहर रहकर रोटी कमाने की दौड़ मैं लगे होते है ! माना की आज पहाड़ बहुत बदल चुका है परन्तु पहाड़ मैं रहने वाले बच्चो के लिए अभी भी यही सच है ! समय काफी आगे निकल गया है आज मैं जिनके बारे मैं लिखने जा रहा हु वो अब हमारे बीच मैं नहीं है , पर उनकी याद सदा दिल मैं रहती है और उनके मेरे जीवन पर बहुत एहसान है , इतना बड़ा परिवार है तो उसका कारण सिर्फ वो है , उन्होंने एक पक्की नीव की तरह हम सब के जीवन को सहारा दिया है ! आज पिताजी की उम्र ७५ साल की हो गयी है और उनसे लगभग बीस साल पहले आमा जन्म कुमाऊ के द्वाराहट स्थित किरौला गाँव मैं हुआ था , मैंने यह गांव कभी नहीं देखा पर सुना जरुर है इस गाँव के बारे मैं ! लगभग १९२० के समय उनका जन्म इस गाँव मैं हुआ होगा ! उनके बचपन के बारे मैं कभी बात नहीं हुई , पर यह जरुर पता है की लगभग १२ वर्ष की उम्र मैं उनकी शादी मेरे दादा जी के साथ हो गयी थी ! १२ वर्ष आज के ज़मा...
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