आज सुबह मन बड़ा दुखी और रुधने सा हो रहा है .....अमृता रावत( पत्नी सतपाल महाराज और पूर्व मंत्री उत्तराखंड सरकार) जी को रोते हुए देख कर मन मैं अन्दर तक दुःख की पीड़ा पहुच गयी, इस्तीफा माँगा हुआ ...कितना दुःख देता है ...यह अनुमान आप .सचमुच इस जनसेवी के अशुप्रुण चेहरे को देख कर लगा सकते है इसलिए मुझसे बिना कुछ कहे रहा नहीं गया...मैं आपसे इस दुःख को शेयर कर रहा हु....मुझे पूर्ण विश्वास है की उनकी इस दुःख की घडी मैं हम सब उनके साथ है....!
उत्तराखंड में पंचायत चुनाव: गांव के विकास की धड़कन पंचायत चुनाव, या पंचायत चुनाव , भारत में ग्रामीण लोकतंत्र की नींव हैं, जो गांवों को उनके भविष्य को संवारने का अधिकार देते हैं। उत्तराखंड में, हिमालय की गोद में बसे गांवों के लिए ये चुनाव विशेष महत्व रखते हैं। जुलाई 2025 में होने वाले उत्तराखंड पंचायत चुनाव की सरगर्मी शुरू हो चुकी है। प्रधानों (ग्राम प्रमुख) से लेकर समग्र विकास तक, ये चुनाव ग्रामीण उत्तराखंड के लिए गेम-चेंजर हैं। आइए जानें कि पंचायत चुनाव क्यों महत्वपूर्ण हैं, ये गांवों के विकास को कैसे बढ़ावा देते हैं, और 2025 के चुनावों से जुड़े कुछ रोचक किस्से जो उत्तराखंड के गांवों की भावना को दर्शाते हैं। पंचायत चुनाव क्यों महत्वपूर्ण हैं पंचायत चुनाव भारत की विकेंद्रित शासन व्यवस्था की रीढ़ हैं, जो 1993 के 73वें संवैधानिक संशोधन द्वारा पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) को संवैधानिक दर्जा देता है। उत्तराखंड, जहां 7,485 ग्राम पंचायतें, 95 ब्लॉक, और 13 जिला पंचायतें हैं, में ये चुनाव ग्रामीण समुदायों के लिए जीवन रेखा हैं। ये गांव वालों को प्रधान , उप-प्रधान और सदस्यों जैसे नेताओं ...
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