आपदा ने पहाड़ को तोड़ के रख दिया है , पहाड़ का दर्द आपको सडको पर, कच्चे रास्तो पर, टूटे हुए मकानों पर, अंतिम सांस लेती दुकानों पर दिख जायेगा, लेकिन इस दर्द ने आज तक प्रशाशन और शाशन करते नेताओ को न तो इसने छुआ है और न ही यह दर्द कभी उनकी आँखों के सामने से गुजरा है, गाँधी पीस फाउंडेशन मैं आयोजित एक गोष्टी ने बहुत हद तक पहाड़ो के इस दर्द को जनता के सामने रखा, इसमें आये सभी गणमान्य जनमानस ने इस दर्द को समझा है, और एक वचन भी लिया है की इस विषय पर बहुत सिद्दत से काम करने की जरुरत भी है, इसी पीड़ा को माननीय न्यायलय के साम ने भी रखा है, इसमें हमारे कुछ समाज सेवी साथी काफी सक्रिय है , और दिल्ली मैं रहते हुए हम और आप लोग इस मुद्दे को सरकार और व्यवस्था के सामने रखेंगे, इस गोष्टी मैं एक पीड़ित मित्र भी उपस्थित थे, जिन्होंने की बहुत कुछ खोया है इस आपदा मैं , परन्तु सरकार लाचार सी दिखी, यह मित्र ही नहीं अगस्तमुनी के बहुत सारे परिवारों ने बहुत कुछ खोया है , जिसकी भरपाई जिंदगी भर नहीं हो सकती है , और इस बुरे वक़्त पे स्थानीय प्रशासन का उदासीन रुख देख कर मन और दुखी हो जाता है ! मैं अपने मित्रो से जरुर अनुरोध करूँगा की व्यवस्था परिवर्तन की इस लड़ाई मैं हमारा साथ दे , जिस से की आपदा पीड़ित लोगो को न्याय मिल सके.
परिचय: जब प्रकृति ने अपना सब्र खो दिया 5 अगस्त 2025। यह तारीख उत्तराखंड के इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है। इस दिन से पहले, उत्तरकाशी जिले में गंगा (भागीरथी) के किनारे बसा खूबसूरत गाँव 'धराली' अपनी सेब के बागानों, शांत वातावरण और हरियाली के लिए जाना जाता था। यह एक ऐसी जगह थी जहाँ लोग शहर के शोर से दूर सुकून के पल बिताने आते थे। लेकिन उस रात, प्रकृति ने अपना वो रौद्र रूप दिखाया जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। कुछ ही घंटों में, हँसता-खेलता धराली गाँव जलमग्न हो गया, और अपने पीछे छोड़ गया सिर्फ तबाही, खामोशी और अनगिनत सवाल। आज हम उस विनाशलीला को याद करेंगे, उसके कारणों की गहराई में जाएँगे और समझने की कोशिश करेंगे कि धराली की इस जल समाधि से इंसान क्या सबक सीख सकता है। आपदा के पीछे के विस्तृत कारण: यह सिर्फ बादल फटना नहीं था अक्सर ऐसी घटनाओं को केवल "बादल फटने" ( Cloudburst ) का नाम देकर एक प्राकृतिक आपदा मान लिया जाता है। लेकिन धराली की त्रासदी कई वर्षों से की जा रही मानवीय गलतियों और प्रकृति की चेतावनियों को नजरअंदाज करने का एक भयानक परिणाम थी। इसक...
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