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पैसे की रिश्तेदारी ...एक नया रिश्ता...!

 बहुत दिनों से एक चीज मन को काफी कचोट रही थी, सोचा आज जरा इसके बारे मैं भी बात की जाय, आधुनिक समाज मैं रिश्तो मैं बहुत बदलाव आया है , अब खून के रिश्ते ही सबसे महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि दोस्ती के रिश्ते , इंसानियत के रिश्ते  और पैसे के रिश्ते , ये रिश्ते कभी कभी खून के रिश्तो से भी प्यारे लगने लगते है जब खून के रिश्ते आप की सहायता करने मैं असमर्थ रहते है , हमने इंसानियत और दोस्ती के रिश्तो के बारे मैं बहुत पढ़ा है , और अपने आस पास इसे  बहुत बार पाया भी है , लेकिन एक रिश्ता जो आजकल काफी प्रचलित है वह है पैसे का रिश्ता , पैसे के रिश्ते से मतलब पैसे के लेन-देन से है , यह एक ऐसी रिलेशनशिप है जो आधुनिक युग मैं काफी इम्पोर्टेन्ट है!

यह रिलेशनशिप किसी समाज से रिलेटेड नहीं है , बल्कि यह सीधा लेन- देन मैं सहभागी लोगो के बीच का रिश्ता है , जिसमे दो लोग या उस से ज्यादा लोग भी हो सकते है! पैसा एक आम जरुरत है , किसी ने पैसे के बारे मैं सच कहा है , पैसा भगवान नहीं है , पर भगवान से कम भी नहीं है , और यही आम जीवन मैं देखने को मिलता है , की पैसे के कारण भाई-भाई मैं झगडा, लड़ाई यहाँ तक की खून भी हो जाते है , इसका सीधा मतलब है की एक जिंदगी भी पैसे के आगे कुछ अहमियत नहीं रखती !
यह विषय है तो काफी गंभीर पर मैं इसे ज्यादा गंभीर नहीं बनाना चाहता इसके कुछ पहुलुओ पर बात जरुर करना चाहूँगा ! मेरे एक मित्र कहते है अगर आप किसी से दोस्ती तोडना चाहते है तो उसे एक बार उधर दे दीजिये बस उसके बाद अपने आप वो आपसे कट जायेगा, और वास्तविक जीवन मैं यह बात सच भी है, कभी जरुर कोशिश कीजियेगा, अगर आप को फिर भी यकीन नहीं आता तो जरा गौर कीजिये , उत्तराखंड की दिल्ली मैं होने वाली रामलीलाए , उनका पतन का सबसे बड़ा कारण क्या था ? कुछ समय पहले तक गाव की शेयर वाली मीटिंग होती थी हर महीने , अब वो भी सिर्फ गिनी चुनी रह गयी है , उनके पतन का कारण क्या था ? कभी चाचा ने कमेटी से पैसे उठा लिए , फिर वो कभी पैसे देने आये ही नहीं, चाचा है कौन बोले . और चाचा ने सब दारू मैं उड़ा दिए, और धीरे -धीरे पैसे न आने के कारण यह भी बंद हो गयी,!
आज जब आप किसी दोस्त से पैसे लेते है या देते है , आप को अचानक व्यवहार मैं परिवर्तन नजर आने लगता है, और लोग आँख बचाकर निकलते है , पैसे की बात ही नहीं होती , और इस से रिश्तो मैं खटास आती है जो फिर कभी कभी बड़ी दुर्घटना का कारण भी बनती है ! दोस्ती मैं अक्सर लेन देन होता है , परन्तु आप सिर्फ कुछ ही लोगो के साथ फाइनेंसियल रिलेशन बनाते है और ये लोग अक्सर वो होते है जो अपनी कमिटमेंट के पक्के होते है ! आप सब की तरह मैंने भी बहुत लोगो से पैसे लिए है और दिए भी है, लेकिन जब आपने पैसे लेने होते है , तब अक्सर आप उस व्यक्ति का फ़ोन व्यस्त पाएंगे, ख़राब पाएंगे , और वह अचानक पुरे पुरे दिन और रात व्यस्त हो जाता है ऐसे बहुत सरे उधारण रोज देखने को मिलते है , कभी कभी बड़ी हसी आती है यह सब देखकर ! लोग नए युग मैं नए प्रकार के एक्स्कूज़ देते है , इसकी बजाय अगर वो सच बोल दे तो शायद काम आसान हो जाय !

इन सब मैं सबसे मुख्य है , जब आप को आपके पैसे लौटने की एक तरीक दे दी जाती है और उसके बाद जब आप पैसे के लिए फ़ोन करते है , तो  फ़ोन मिलता ही नहीं है और साहब नेटवर्क से ही बाहर चले जाते है , उसमे बड़ा दुःख होता है , क्योकि आप ने वो पैसे किसी और काम के लिए देने होते है , और आपको खामखा इस बेइज्ज्जति का सामना करना पड़ता है , इसकी बजायअगर आपको समय से इस विलम्ब का पता चल जाता तो शायद यह स्थिति नहीं आती, पर अक्सर ऐसे मित्र समय पे धोखा दे जाते है ...इसीलिए आपको समझ लेना चाहिए की ये श्रीमान के साथ दोस्ती ठीक है पर फाइनेंसियल रिलेशन ठीक नहीं है !
मॉडर्न बैंकिंग सिस्टम मैं एक पद्धति विकसित हुई है जिसे CIBIL  स्कोर कहते है , जो एक क्रेडिट रेटिंग है जिस से यह पता चलता है की क्या इनको ऋण देना ठीक होगा, आपका स्कोर अगर ७५० से ऊपर है तो इसका मतलब है आपको ऋण दिया जा सकता है और आप पैसे भी वापस करेंगे, क्योकि यह रेटिंग आपके पहले लिए हुए ऋण पर आधारित होती है ,... दोस्तों  व्यहारिक जीवन मैं भी सिर्फ उन्हें ही ऋण देना लोग पसंद करते है जिनकी उधर वापस करने के आदत सही होती है , ...इसलिए दोस्तों ध्यान रहे कही आप अपनी क्रेडिट रेटिंग तो ख़राब नहीं कर रहे जाने - अनजाने मैं ....यह बात बिज़नस मैं भी लागु होती है , लोग सिर्फ उन लोगो से डील करना चाहते है जो समय से लेन -देन पूरा करते है , इसलिए जैसे पति पत्नी के रिश्ते मैं कमिट-मेंट की जरुरत है वैसे ही फाइनेंसियल रिश्तेदारी मैं भी ईमानदारी की जरुरत है ...तो सदा याद रखे ...की आपका CIBIL स्कोर कम होता है अगर आप अपना वडा पूरा नहीं करते तो ....इसलिए वादा वो करो जो पूरा कर सको ...!

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