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जागो - ग्राहक - जागो ..!

जागो ग्राहक जागो !

उत्तराखंड से हु, रहता दिल्ली मैं हु , लेकिन मात्रभूमि पर सदा नजर रहती है , चाहे सुख हो दुःख हो या बरसात , आज एक ऐसे ही मुद्दे पर बात करने को दिल कर रहा है जिस मुद्दे को कभी न कभी आपको छुआ होगा चाहे आप उत्तराखंड की जमीन पर रहते हो, या वहा साल मैं कभी कभी जाते हो , या फिर दिल मैं उत्तराखंड को दिल मैं रखते हो !

आज को बाजार युग मैं , ग्राहक सबसे महत्वपूर्ण हो गया है , और सरकार, सामाजिक संगठन सब चाहते है कि ग्राहक और समझदार बने और अपने अधिकार समझे ! आज इसी विषय पर बात करना चाहता हु और आपकी प्रतिक्रिया चाहता हु :

मुझे उत्तराखंड के परिपेक्ष मैं इन तीन शक्तियों से कभी पूरी तरह से satisfy नहीं हो पाया , और न ही कोई  consumer court मेरी सुन ने के लिए तैयार है , सबसे पहले बताना चाहता हु ,मुझे किनसे पूरी customer service नहीं मिली  है , वह है :

१. हमारे  परिवार के जो-ज्यू ..( बामन) से

२. हमारे परिवार केजगरिये  से (जो हमारे  कुलदेवताको नचाता है )

३. हमारे हलिये से ( जो हमारे खेत जोत ता है )

अगर आप पहाड़ के हो तो क्या आप मुझसे सहमत है , दुखी है इनकी  customer service  से , अगर हा तो कैसे आप इन कष्टों न निवारण करेंगे..आपके पास सुझाव है तो मुझे भी बताये कैसे इनसे निजात पायी जाय, जिस से मेरे दुखो का निवारण हो ...और किस प्रकार का दुःख है आपका ...इस पर भी विचार करेंगे....आपकी प्रतिक्रिया का आभारी हु...!

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