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Kaise hoga Uttrakhand ke samaj ka nirman?



उत्तराखंड समाज की होने वाली मीटिंग्स मैं अक्सर आना-जाना होता है, और मुझे कुछ दुख इस समाज के सॉफ नजर आये , उसमे सबसे बड़ा दुख है, उत्तराखंडी लोगो की संख्या तीस लाख के लगभग होने के बावजूद , हमारा दिल्ली मैं कोई वजूद नहीं है, दूसरा दुख की हमारा समाज अपने लोगो का साथ ना देकर सदा दूसरे समाज के लोगो के नीचे काम करता है, तीसरा दुख है की , हमारे समाज मैं सब लोग अपनी रार्जनीति चमकाते रहते है चाहे विषय कोई भी क्यो ना हो ! मैने जितनी भी मीटिंग इस प्रकार की अटेंड की है उन सब मैं इन प्रशनो पर गहन विचार विमर्श होता है, पर समाधान आज tak मुझे नजर नहीं आया , अब मौका कोई भी क्यो ना हो, समय कोई भी क्यो ना हो, चाहे कोई विशेष मुद्दे पर चर्चा हो, आपदा पर चर्चा हो, election की बात हो, कोई शादी हो, चाहे कोई नामकरण क्यो ना हो, हम मैं से कुछ लोग सदा इन प्रश्नो को लेकर परेशान रहते है ! कभी-कभी मुझे लगता है ये प्रश्‍न भी जल,जंगल,जमीन की तरह हो गये है जिनका जवाब आजतक उत्तराखंड को नहीं मिल पाया है। पर यह भी एक सच है की हम अपने आप के अलावा सब को राज्नीतिग्य, कूट्नीतिग्य और अवसरवादी कहने मैं दो मिनट नहीं लगाते परंतु अपने आपको दूध का धुला हुआ मानते है, अपने आप मैं कृष्ण नजर आते है और दूसरो मैं कंश, जब तक हम अपने आप को नहीं सुधारते फिर कैसे होगा उत्तराखंड निर्माण? अपने लोगो का मान सम्मान , अपने बुजुर्गो का मन- सम्मान जब तक यह समाज नहीं करेगा तब तक यह समाज ऐसे ही छिन्न-भिन्‍न रहेगा।...जै हो।.!

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