छोटे परिवार का एक दुःख यह भी है की माँ बाप के पास बच्चो के लिए समय काफी कम रहता है , लेकिन कभी कभी बच्चे ऐसी जिद कर बैठते है की माँ बाप को न चाहते हुए भी वह जिद माननी पढ़ती है, ऐसा ही आजकल मेरे साथ हो रहा है, हुए यो की मेरी छोटी बेटी जो अभी दूसरी कक्षा मैं पढ़ती है , वो अचानक एक पेट पालने कि जिद करने लगी , क्योकि हमारे एक रिश्तेदार ने अभी एक बड़ा कुत्ता गोद लिया है, वह चाहती है की हम भी एक पप्पी पाले, परन्तु दिन मैं क्योकि ऑफिस जाना होता है तो उसका ख्याल कौन रखे, उसे यह समझ आ गया और वह मान गयी , लेकिन अगले ही मिनट उसने एक शर्त रख दी, की ठीक है हम पप्पी नहीं पाल सकते , परन्तु एक काम जरुर कर सकते है , हर सन्डे को एक दिन आप मेरा डोगी बनेंगे और एक सन्डे मम्मी, और यह शर्त आपको माननी पड़ेगी, अन्यथा डोगी लाओ,....और उसकी जिद के आगे हम लोगो को झुकना पड़ा , पिछले हफ्ते वाइफ डोगी बनी थी इस सप्ताह मेरा नंबर है, उसने अभी से वो कुत्ते वाला पट्टा निकाल कर प्रेस कर दिया है....इस बार सन्डे को तो पक्का जुतुन्गा मैं भी......इसलिए साथियों इस सन्डे के सामाजिक काम मैं नहीं पहुच पाया तो समझ लेना आज कुत्ता बनने की बारी मेरी थी....जय हो शादी शुदा लोगो की...!
पहाड़ के बच्चो का जीवन अकसर अपनी माता जी या दादी जी के आँचल मैं पलता और बड़ा होता है , क्योकि पुरुष अधिकतर समय गाव से बाहर रहकर रोटी कमाने की दौड़ मैं लगे होते है ! माना की आज पहाड़ बहुत बदल चुका है परन्तु पहाड़ मैं रहने वाले बच्चो के लिए अभी भी यही सच है ! समय काफी आगे निकल गया है आज मैं जिनके बारे मैं लिखने जा रहा हु वो अब हमारे बीच मैं नहीं है , पर उनकी याद सदा दिल मैं रहती है और उनके मेरे जीवन पर बहुत एहसान है , इतना बड़ा परिवार है तो उसका कारण सिर्फ वो है , उन्होंने एक पक्की नीव की तरह हम सब के जीवन को सहारा दिया है ! आज पिताजी की उम्र ७५ साल की हो गयी है और उनसे लगभग बीस साल पहले आमा जन्म कुमाऊ के द्वाराहट स्थित किरौला गाँव मैं हुआ था , मैंने यह गांव कभी नहीं देखा पर सुना जरुर है इस गाँव के बारे मैं ! लगभग १९२० के समय उनका जन्म इस गाँव मैं हुआ होगा ! उनके बचपन के बारे मैं कभी बात नहीं हुई , पर यह जरुर पता है की लगभग १२ वर्ष की उम्र मैं उनकी शादी मेरे दादा जी के साथ हो गयी थी ! १२ वर्ष आज के ज़मा...
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