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Ummed nyay ki ....Kiran Negi

उम्मीद से झूझती जिंदगी ! किरण नेगी

उम्मीद के सहारे रोज कोर्ट के दर पर हम आ कर खड़े होते है, चरमराती जिंदगी को शायद न्याय कुछ राहत दे दे, लेकिन ऐसा अभी नजर नहीं आ रहा है, 9 फरवरी 2012 से बनी यह उम्मीद अभी तक खाली हर रोज कुछ दम जरूर तोड़ देती है, हम रोज इस आस मैं यहा इकठआ होते है की शायद आज आखिरी दिन है, आज हमे न्याय मिलेगा, आज हमारी चाह्त पूरी होगी, आज यह दरिन्दे फांसी चढ़ेंगे , परंतु शाम होते होते सब उम्मीदे स्थिल हो जाती है और एक नयी उम्मीद फिर जनम लेती है, एक नयी तारीख न्यायालय ने दे दी है , और एक नयी उम्मीद हम ने बाध ली है, समाज और न्यायिक तंत्र दोनो की परीक्षा की घड़ी है, समय ही बतायेगा की क्या यह दोनो इस परीक्षा मैं खरे उतर पायेंगे? लेकिन आज के लिये सिर्फ इतना है ....अब 5 फरवरी को फिर उम्मीद की भीड़ कोर्ट के बाहर खड़ी होगी, शायद इस दिन किरण नेगी को नयाय मिल पायेगा।.!

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