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Kab Milegi mujhe sachchi Shradhanjali?? Kiran Negi

 कब मिलेगी मुझे सच्ची  श्रधांजलि? किरण नेगी !

एक छोटी सी आशा ने जन्म लिया , किरण उसका नांम दिया , और वो चल उठी थी अपना घर रोशन करने, और साथ साथ कुछ रोशनी इस दुनिया मैं फैलाने, रोजी - रोटी  गाव की खेती नहीं दे सकती थी , इसलिये पकड़ ली शहर की राह,    दिल्ली आके भी दर्द कम कहा हुआ, सुबह शाम रात सिर्फ दो वक़्त की रोटी जुटाने की चिंता , सिर्फ दो हाथ काम करे तो पूरा परिवार खाये , असंभव भरा काम है , जबकि कोई सरकारी नौकरी या अच्छी पढ़ाई से मिली नौकरी ना हो तो, इसी उधेड़बुन मैं छोटी सी किरण काफी बड़ी हो गयी, बचपन तो सिर्फ खुसनसीबो के लिये होता है, गरीब तो पैदा होते ही  लग जाता है रोटिया जुटाने मैं, शायद यही किरण का भी जीवन था, कब १२ पास की कब बड़ी हो गयी पता ही नहीं चला, जल्दी थी की कैसे पिता के साथ मिलकर चार हाथ बनाये जाय उनके, पढ़ाई अब पार्ट टाइम हो चली थी, और पार्ट टाइम नौकरी मैं लगने लगा, ग्रॅजुयेशन करके एक अच्छी अध्यापक की नौकरी का लक्ष्य था , यह किरण का जिंदगी का मकसद था परंतु, कुछ सामाजिक बुराईया जो पड़ोस की गालियो मैं सांस ले रही थी उनके इरादे इन अच्छे इरादो का आड़े आ रहे थे, वो जिस्मानी भूख इस पेट की भूख के सामने  ज्यादा बड़ी थी , और फिर वह असुभ् दिन आया , जिस दिन किरण अपने घर चाह कर भी नहीं पहुच पायी, जिस्मानी भूख के तांडव ने उसे अपनी गिरपत मैं लिया और  उसके जिस्म को वहसी दरिंदो ने अपनी हवस से तार-तार कर दिया, लेकिन यह भूख कहा थमी अभी , इसने एक ऐसा नफरत का मोड लिया की किरण को इस दुनिया से सदा के लिये  अलविदा कह कर तारो के बीच मैं शरण लेनी पड़ी, आज वो शायद महफूज़ है उस भगवान के घर मैं, लेकिन कोर्ट की लम्बी होती तारीखे और अपराधियो को ना मिलती सजा ने माता-पिता के इस दर्द को नासूर बना दिया है, किरण अभी भी पूछ रही ह़ै कब मिलेगी मुझे सच्ची  श्रधांजलि? 

टिप्पणियाँ

  1. Very sorry state of affairs for the family, had lost daughter and now running from pillar to post to find justice, how long will it take to get it?? only god knows.

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