एक छोटी सी आशा ने जन्म लिया , किरण उसका नांम दिया , और वो चल उठी थी अपना घर रोशन करने, और साथ साथ कुछ रोशनी इस दुनिया मैं फैलाने, रोजी - रोटी गाव की खेती नहीं दे सकती थी , इसलिये पकड़ ली शहर की राह, दिल्ली आके भी दर्द कम कहा हुआ, सुबह शाम रात सिर्फ दो वक़्त की रोटी जुटाने की चिंता , सिर्फ दो हाथ काम करे तो पूरा परिवार खाये , असंभव भरा काम है , जबकि कोई सरकारी नौकरी या अच्छी पढ़ाई से मिली नौकरी ना हो तो, इसी उधेड़बुन मैं छोटी सी किरण काफी बड़ी हो गयी, बचपन तो सिर्फ खुसनसीबो के लिये होता है, गरीब तो पैदा होते ही लग जाता है रोटिया जुटाने मैं, शायद यही किरण का भी जीवन था, कब १२ पास की कब बड़ी हो गयी पता ही नहीं चला, जल्दी थी की कैसे पिता के साथ मिलकर चार हाथ बनाये जाय उनके, पढ़ाई अब पार्ट टाइम हो चली थी, और पार्ट टाइम नौकरी मैं लगने लगा, ग्रॅजुयेशन करके एक अच्छी अध्यापक की नौकरी का लक्ष्य था , यह किरण का जिंदगी का मकसद था परंतु, कुछ सामाजिक बुराईया जो पड़ोस की गालियो मैं सांस ले रही थी उनके इरादे इन अच्छे इरादो का आड़े आ रहे थे, वो जिस्मानी भूख इस पेट की भूख के सामने ज्यादा बड़ी थी , और फिर वह असुभ् दिन आया , जिस दिन किरण अपने घर चाह कर भी नहीं पहुच पायी, जिस्मानी भूख के तांडव ने उसे अपनी गिरपत मैं लिया और उसके जिस्म को वहसी दरिंदो ने अपनी हवस से तार-तार कर दिया, लेकिन यह भूख कहा थमी अभी , इसने एक ऐसा नफरत का मोड लिया की किरण को इस दुनिया से सदा के लिये अलविदा कह कर तारो के बीच मैं शरण लेनी पड़ी, आज वो शायद महफूज़ है उस भगवान के घर मैं, लेकिन कोर्ट की लम्बी होती तारीखे और अपराधियो को ना मिलती सजा ने माता-पिता के इस दर्द को नासूर बना दिया है, किरण अभी भी पूछ रही ह़ै कब मिलेगी मुझे सच्ची श्रधांजलि?
उत्तराखंड में पंचायत चुनाव: गांव के विकास की धड़कन पंचायत चुनाव, या पंचायत चुनाव , भारत में ग्रामीण लोकतंत्र की नींव हैं, जो गांवों को उनके भविष्य को संवारने का अधिकार देते हैं। उत्तराखंड में, हिमालय की गोद में बसे गांवों के लिए ये चुनाव विशेष महत्व रखते हैं। जुलाई 2025 में होने वाले उत्तराखंड पंचायत चुनाव की सरगर्मी शुरू हो चुकी है। प्रधानों (ग्राम प्रमुख) से लेकर समग्र विकास तक, ये चुनाव ग्रामीण उत्तराखंड के लिए गेम-चेंजर हैं। आइए जानें कि पंचायत चुनाव क्यों महत्वपूर्ण हैं, ये गांवों के विकास को कैसे बढ़ावा देते हैं, और 2025 के चुनावों से जुड़े कुछ रोचक किस्से जो उत्तराखंड के गांवों की भावना को दर्शाते हैं। पंचायत चुनाव क्यों महत्वपूर्ण हैं पंचायत चुनाव भारत की विकेंद्रित शासन व्यवस्था की रीढ़ हैं, जो 1993 के 73वें संवैधानिक संशोधन द्वारा पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) को संवैधानिक दर्जा देता है। उत्तराखंड, जहां 7,485 ग्राम पंचायतें, 95 ब्लॉक, और 13 जिला पंचायतें हैं, में ये चुनाव ग्रामीण समुदायों के लिए जीवन रेखा हैं। ये गांव वालों को प्रधान , उप-प्रधान और सदस्यों जैसे नेताओं ...

Very sorry state of affairs for the family, had lost daughter and now running from pillar to post to find justice, how long will it take to get it?? only god knows.
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