मीडिया मैं आने वाले बयान कभी कभी बड़े हाशयप्रद लगने लगते है, एक ऐसी डिबेट जिसमे गणित मैं फैल विद्यार्थी इतिहास मैं फ़ैल वाले को कहता है कि तुम नालायक हो, जब कि वह खुद भूल गया है कि वह खुद गणित मैं जीरो लाया है, अगर आप अभी भी नहीं पहचाने तो मैं बात कर रहा हु अपने कपिल सिबल कि, आज उन्होंने मोदी साहब के बारे मैं एक बयां दिया है जिसमे उन्होंने कहा है कि मोदी जी को इतिहास कि जानकारी नहीं इसलिए वो कभी देश नहीं चला सकते , पर कपिल सिबल साहब आपको भी तो गणित का ज्ञान नहीं है ...फिर आप कैसे कानून मंत्रालय चला रहे है, क्योकि अपने भी तो कहा है कि टु जी घोटाले मैं नुकसान जीरो हुआ है ! ये है हमारा भारत ....और ये है हमारे नेता ....और फिर लड़ाई सरदार पटेल पे करते है
परिचय: जब प्रकृति ने अपना सब्र खो दिया 5 अगस्त 2025। यह तारीख उत्तराखंड के इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है। इस दिन से पहले, उत्तरकाशी जिले में गंगा (भागीरथी) के किनारे बसा खूबसूरत गाँव 'धराली' अपनी सेब के बागानों, शांत वातावरण और हरियाली के लिए जाना जाता था। यह एक ऐसी जगह थी जहाँ लोग शहर के शोर से दूर सुकून के पल बिताने आते थे। लेकिन उस रात, प्रकृति ने अपना वो रौद्र रूप दिखाया जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। कुछ ही घंटों में, हँसता-खेलता धराली गाँव जलमग्न हो गया, और अपने पीछे छोड़ गया सिर्फ तबाही, खामोशी और अनगिनत सवाल। आज हम उस विनाशलीला को याद करेंगे, उसके कारणों की गहराई में जाएँगे और समझने की कोशिश करेंगे कि धराली की इस जल समाधि से इंसान क्या सबक सीख सकता है। आपदा के पीछे के विस्तृत कारण: यह सिर्फ बादल फटना नहीं था अक्सर ऐसी घटनाओं को केवल "बादल फटने" ( Cloudburst ) का नाम देकर एक प्राकृतिक आपदा मान लिया जाता है। लेकिन धराली की त्रासदी कई वर्षों से की जा रही मानवीय गलतियों और प्रकृति की चेतावनियों को नजरअंदाज करने का एक भयानक परिणाम थी। इसक...
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